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यूरिया से मुक्ति, पार्ट-2

यूरिया के बिना खेती कैसे संभव है?

पिछली चर्चा से आप यह तो जान गए होंगे कि यूरिया नाइट्रोजन सबसे सस्ता और समृद्ध विकल्प है। पिछली चर्चा पर जाने के लिए यहां क्लिक करें

यूरिया से सस्ती सिर्फ हवा है, जिसमें 78% नाइट्रोजन होती है, यूरिया से भी ज्यादा!

हवा की नाइट्रोजन को कैसे पौधों के उपयोग लायक बनाया जाय यह प्रमुख मुद्दा है। और इसका जवाब प्रकृति के पास है।

हवा की डाई नाइट्रोजन को प्रयोग करने की जो क्षमता पौधों और जंतुओं के पास नहीं है, वह प्रकृति ने सूक्ष्म जीवों को दी है। हवा की डाई नाइट्रोजन को पौधों के लिये उपयोगी रूप में बदलने को नाइट्रोजन फिक्सेशन कहा जाता है, ठीक वैसे ही जैसे पौधों द्वारा हवा की कार्बन दाई ऑक्साइड को शक्कर, स्टार्च आदि में परिवर्तन करने को कार्बन फिक्सेशन कहा जाता है।

कृषि के लिये दो प्रमुख प्रजातियों के नाइट्रोजन फिक्सेशन करने वाले सूक्ष्म जीव उपयोगी हैं। परन्तु हम कुछ और कृषि उपयोगी नाइट्रोजन फिक्स करने वाले सूक्ष्म जीवों के विषय में जानेंगे।

एक मूल बात समझने की है कि कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव तभी नाइट्रोजन फिक्स कर सकते हैं जब उन्हें ऊर्जा के लिये कोई कोई कार्बन स्त्रोत जैसे आर्गेनिक मैटर, पौधों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही शर्करा आदि उपलब्ध हो। नाइट्रोजन फिक्सेशन अत्यधिक ऊर्जा खपत वाली प्रक्रिया है।

तो बेसिक प्रक्रिया यह है कि पौधे फ़ोटो सिंथेसिस से शर्करा निर्माण करते हैं, उसका एक हिस्सा सहजीवी या मित्रजीवी सुक्ष्म जीवों को उपलब्ध करवाते हैं, बदले में ये सूक्ष्म जीव नाइट्रोजन फिक्स करते हैं जिसे पौधे अवशोषित कर लेते हैं और प्रोटीन, एंजाइम, डीएनए, RNA आदि बहुउपयोगी जैविक सामग्री का निर्माण करते हैं।

यह प्राकृतिक प्रक्रिया एकदम मुफ्त और अत्यधिक प्रभवशाली है क्योंकि ये सूक्ष्म जीव सिर्फ नाइट्रोजन फिक्स नहीं करते बल्कि कई ऐसे बायो केमिकल्स का निर्माण करते हैं जिससे पौधों की वृद्धि विकास और स्वास्थ्य में लाभकारी परिणाम मिलते हैं।

नाइट्रोजन फिक्स करने वाला प्रमुख बैक्टीरिया है, एजोटोबैक्टर। यह मुक्तजीवी-मित्र सूक्ष्म जीव है। मुक्तजीवी का मतलब कि यह जड़ों या पौधों के भीतर नहीं रहता। परंतु शर्करा व अन्य भोजन के लिये जड़ों के आसपास अपना डेरा जमता है, बदले में अमोनियम रूप में नाइट्रोजन पौधों को उपलब्ध करवाता है। एजोस्पिरिल्लिम भी इसी प्रकार का मुक्तजीवी मित्र बैक्टीरिया है।

दूसरे नंबर पर राइजोबियम और इससे रिलेटेड बैक्टीरिया हैं। ये बैक्टीरिया जड़ों के भीतर पौधों के साथ मिलकर खास संरचनाओं का निर्माण करते हैं जिन्हें रुट नोड्योल कहा जाता है। ये ग्रंथियां विशेष प्रकार की कोठरियां हैं जहां पौधा राइजोबियम को रहने और काम करने की सुविधाएं और परिस्थितियां उपलब्ध करवाते हैं। सबसे खास चीज वह लाल रंग का तरल है जिसे लैग हीमोग्लोबिन कहा जाता है। यह विशेष तरल राइजोबियम को ऑक्सीजन से बचाने के लिए पौधे द्वारा बनाया जाता है। ऑक्सीजन की उपस्थिति में नाइट्रोजन फिक्सेशन की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।

राइजोबियम से सम्बद्ध यह बात ध्यान देने की है कि हर दलहनी फसल का राइजोबियम विशिष्ट होता है। कोई भी पौधा बिना जेनेटिक जान पहचान के किसी भी सूक्ष्म जीव को भीतर घुसकर रहने की इजाजत नहीं देता।

चने और सोयाबीन के राइजोबियम अलग अलग होते हैं। मेथी, उड़द-मूंग और लचका भी दलहन पौधे हैं और इनमे भी राइजोबियम नाइट्रोजन फिक्स करते हैं।

गन्ने और संबंधित फसलों में विशिष्ट प्रकार के सहजीवी यानी पौधे के भीतर रहने वाले सूक्ष्म जीव पाए जाते हैं। इन्हें एसिटोबैक्टर या ग्लूकॉनोबैक्टर कहा जाता है। ये गन्ने की कोशिकाओं के भीतर रहकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं।

सूक्ष्म जीवों के माध्यम से प्रति एकड़ कितनी नाइट्रोजन उपलब्ध हो सकती है? जानने के लिए, यूरिया से मुक्ति, पार्ट 3 देखें।