पोटैशियम के स्रोत और पौधों के लिए उसकी उपलब्धता

भूमि में पोटाश सामान्यता पौधों की जरूरत से ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। कई जगहों पर यह 20 ग्राम प्रति किलोग्राम मिट्टी से भी ज्यादा होती है। अत्यधिक मात्रा में होने के बावजूद भी मिट्टी में उपस्थित पोटाश पौधों के लिए उपलब्ध रूप में नहीं होता। पोटाश जमीन यानी मिनिरल्स का स्ट्रक्चरल कंपोनेंट है, अर्थात मिट्टी के संरचनात्मक घटक होने के कारण यह मिट्टी में कांपलेक्स रूप में होता है परंतु पौधे के लिए उपलब्ध नहीं होता। मिट्टी का पोटाश पौधे के काम आएगा या नहीं यह इस तथ्य पर निर्भर है की चट्टान से मिट्टी का निर्माण कौन सी अवस्था पर है। पहाड़ी इलाकों की मिट्टी अगर पुरानी हो चुकी है तो यह संभावना अधिक है कि चट्टान में उपस्थित पोटाश अब पौधे के लिए उपलब्ध रूप में आ चुका होगा, बशर्ते पानी द्वारा उसका नियमित क्षरण ना होता रहे। मिट्टी की गहराई और मिनरल्स की उपलब्धता पोटाश की मात्रा को निर्धारित करती है।

माइका, पोटाश के खनिज रूपों में से एक। इसमें 4% तक पोटाश हो सकता है। यह मालवा (रंगवासा, राऊ) इलाके का सैंपल है।

पोटाश की उपलब्धता के अनुसार इसे मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है। एक अनुपलब्ध पोटाश दूसरी धीमी गति से उपलब्ध पोटाश और तीसरी सामान्यता उपलब्ध पोटाश यानी एक्चेंजेबल पोटाश प्राकृतिक रूप से पोटाश के यह तीनों रूप आपस में समन्वित या interchangable होते हैं।
मिट्टी में उपलब्ध पोटाश का 90 से 95 परसेंट हिस्सा मिनरल रूप में ही पाया जाता है यानी अनुपलब्ध रूप में। माइका और फेल्सपार पोटाश के प्रमुख मिनिरल हैं इस रूप में उपस्थित पोटाश को पौधे प्रयोग नहीं कर पाते। पोटाश खनिज कालांतर में धूप, पानी और हवा के प्रभाव से आसान रूप में परिवर्तित हो जाते हैं और पोटैशियम पौधे के लिए उपलब्ध रूप में परिवर्तित हो जाता है, परंतु इस कार्य की गति अत्यंत धीमी होती है फसल के लिए आवश्यक पोटाश की मात्रा की पूर्ति करने के लिए यह स्पीड निष्प्रभावी होती है।
अब बात करें धीमी गति से उपलब्ध पोटाश के रूपों की। मिट्टी की परतों के बीच में बंधित हुआ पोटाश इस कैटेगरी में आता है। इसका एक हिस्सा पौधे के लिए आसानी से उपलब्ध पोटाश के रूप में भी हो सकता है। पोटाश के यह रूप कितने अनुपात में उपस्थित हैं यह मिट्टी की संरचना और प्रकार पर निर्भर करता है। क्ले प्रकार की मिट्टी में पोटेशियम को रोकने की क्षमता होती है और यह धीरे धीरे पौधे को मिलता है। सूखने पर क्ले पोटेशियम को सोख लेती है और पानी मिलने पर के पुनः पौधे को प्राप्त हो जाता है. क्ले मिट्टी के भिन्न-भिन्न प्रकार भिन्न-भिन्न गति से पोटेशियम रिलीज करते हैं। कुछ प्रकार की क्ले तो पोटैशियम फर्टिलाइजर डालने पर पोटेशियम को रोक लेती है और पौधे को पर्याप्त मात्रा में पोटैशियम उपलब्ध नहीं होने देती।

अब आते हैं पोटेशियम के सबसे ज्यादा उपलब्ध रूप यानी पानी में घुलित रूप या विलयन रूप पर. पानी में घुला हुआ पोटैशियम अपने आयनिक रूप में उपलब्ध होता है। इस पोटेशियम आयन को पौधे आसानी से ग्रहण कर लेते हैं। मिट्टी के कणों के बाहरी सतह पर भी पोटैशियम अपने आयन रूप में उपलब्ध होता है और उसे भी पौधे आसानी से ग्रहण कर सकते हैं। पोटेशियम के इस रूप को एक्चेंजेबल पोटैशियम कहा जाता है।

इस पूरी वार्ता को संक्षिप्त रूप में लिखें तो;

मिनिरल्स के रूप में उपस्थित धीमी गति से उपलब्ध पोटाश 🔄 मृदा कणों  विनिमय योग्य पोटाश🔄 आसानी से उपलब्ध पोटाश (आयन रूप में)

जमीन से पोटाश की उपलब्धता नमी और तापमान पर भी आश्रित होती है।

पौधों द्वारा अवशोषित पोटाश पौधे की मृत्यु उपरांत सूक्ष्म जैविक विघटन की प्रक्रिया से गुजर कर पुनः अन्य जीवों के लिए उपलब्ध हो जाती है।

भूमि से पौधों द्वारा पोटेशियम का अवशोषण कई प्रकार के कार्य को यानी फैक्टर्स पर निर्भर करता है

भूमि की नमी
भूमि में वायु प्रवाह और ऑक्सीजन की मात्रा
भूमि का तापमान
जुताई

पानी की अच्छी उपलब्धता पोटेशियम की मोबिलिटी बढ़ा देती है। ज्यादा पानी यानी ज्यादा उपलब्ध पोटैशियम।
इसी से जुड़ा हुआ फेक्टर है जमीन में हवा का प्रवाह और ऑक्सीजन की मात्रा। सोचने की बात यह है कि जमीन में जब अधिक मात्रा में पानी उपलब्ध होगा तो हवा की मात्रा कम हो जाएगी। पोटेशियम की उपलब्धता और अवशोषण के लिए भूमि में नमी और हवा के बीच बैलेंस बना रहना आवश्यक है। हवा में घुलित ऑक्सीजन पौधे की जड़ों द्वारा सांस लेने के लिए प्रयोग की जाती है और यह प्रक्रिया पोटेशियम के अवशोषण के लिए जरूरी है।
अब अगर तापमान की बात करें तो ऐसा तापमान जो पौधे की वृद्धि और विकास के लिए जरूरी है उस तापमान पर पोटेशियम का अवशोषण सबसे उपयुक्त गति से होता है। 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पोटेशियम के अवशोषण के लिए उपयुक्त माना जा सकता है। पोटैशियम का अवशोषण निम्न तापमान पर कम होता है।
जुताई का प्रभाव पोटेशियम की उपलब्धता पर काफी प्रॉमिनेंट होता है। बिना जुताई और सिर्फ बोई जाने वाली जगह पर जुताई वाली विधि में पौधों में पोटेशियम की कमी देखी जाती है। ऐसी विधियों में जडें ठीक से विकसित नहीं हो पाती और मिट्टी में उनका फैलाव भी सीमित रहता है।

पोटेशियम की कमी के लक्षणों की अगर बात करें तो यह भिन्न भिन्न फसलों में अलग-अलग रूप में परिभाषित होता है। साथ ही फसल की उम्र पर इसकी कमी के लक्षणों को प्रभावित करती है इस लिए किसी एक लक्षण को पैरामीटर नहीं माना जा सकता।

पोटेशियम उर्वरकों की बात करें तो पोटाश उर्वरक और उनमें उपलब्ध प्रतिशत पोटैशियम की एक लिस्ट निम्न है;
Potassium Nitrate (13:0:45) – 45-46%
Potassium chloride (0:0:60)- 60-62%
Potassium Sulphate (0:0:50)- 50%
Potassium sonite (0:0:20)- 20%

खाद की बोरी में (जैसे यहां पर खाद के नाम के बगल में लिखा है) अनुपातिक विधि से जो अंक लिखे होते हैं, वे खाद में उपस्थित नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटाश की मात्रा को क्रमशः इंगित करते हैं। इसमें तीसरे स्थान पर जो अंक लिखा होता है, वह खाद में पोटैशियम की मात्रा दिखाता है।
उदाहरण के लिए 12:32:16 में 16% पोटाश होता है। विभिन्न खादों को इस अनुपातिक अंक विधि द्वारा भी पहचाना जाता है।

एक सामान्य तौर पर पूछे जाने वाला सवाल यह है कि सफेद और लाल पोटाश में क्या फर्क होता है?
सफेद, गुलाबी और लाल रंग के पोटाश यानी 0:0:60 की गुणवत्ता में एक दूसरे की तुलना में कोई खास फर्क नहीं होता। तीनों ही लगभग एक समान रूप से प्रभावी है। इनके रंग में जो अंतर है वह इनमें आयरन की अशुद्धि के कारण होता है ।

Potassium Sulphate का प्रयोग पोटेशियम की पूर्ति के लिए किए जाने पर सल्फर भी पौधे को उपलब्ध हो जाता है इसी प्रकार पोटैशियम शोनाइट का प्रयोग करने पर सल्फर के साथ-साथ मैग्नीशियम की भी पूर्ति फसल को होती है। Potassium नाइट्रेट नाइट्रोजन का भी अच्छा स्रोत है। Potassium nitrate और Potassium Sulphate पोटैशियम क्लोराइड की तुलना में काफी महंगे पड़ते हैं।

गोबर की खाद और फसल अपशिष्ट में भी पोटैशियम पाया जाता है। कम्पोस्ट में पोटैशियम की मात्रा अपशिष्ट के प्रकार, उसकी उम्र और बारिश के पानी द्वारा हुई क्षति के आधार पर कम या ज्यादा हो सकता है। कम्पोस्ट द्वारा फसल को पोटाश की पूर्ति के लिए पोटैशियम और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा की जांच जरूर करनी चाहिए, ताकि बढ़िया उत्पादन के लिए सही मैनेजमेंट किया जा सके।

आइए अब इस पर चर्चा करें की खनिज रूप और मिट्टी में कांपलेक्स रूप में उपस्थित पोटेशियम को किस प्रकार सूक्ष्मजीवों की मदद से पानी में घुलित रूप में परिवर्तित कर पौधे को उपलब्ध कराया जा सकता है। सूक्ष्म जीवों का प्रयोग पोटेशियम की घुलनशीलता बढ़ाने के लिए किया जाना कोई नया कार्य नहीं है। विभिन्न प्रकार के पौधे अपनी जड़ों में कुछ खास किस्म के सूक्ष्मजीवों को स्थान और पोषण प्रदान करते हैं, और बदले में यह सूक्ष्मजीव पौधों की जड़ों के आसपास के खनिजों को घोल कर उन्हें आसान रूप में परिवर्तित कर पौधे को उपलब्ध करवाते हैं।
इन्हीं में से ज्यादा प्रभावशाली सूक्ष्मजीवों को चयनित कर उन्हें फसलों में पोटेशियम की उपलब्धता और अवशोषण बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
नीचे के चित्रों में आप देखेंगे कि पेट्री डिश में पोटेशियम मिनरल्स का सूक्ष्मजीवों के माध्यम से solubilization किया गया है जो कि बैक्टीरिया की कॉलोनी के आसपास गोल घेरे के रूप में परिलक्षित है।

पोटाश घोलक बैक्टीरिया, चट्टान यानी खनिज में उपस्थित पोटाश को घोलने की क्षमता रखते हैं, बशर्ते कॉर्बन और ऊर्जा स्त्रोत यानी ग्लूकोज उपलब्ध हो।

अधिक जानकारी के लिए 9926622048 या 7987051207 पर संपर्क कर सकते हैं।

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