वैज्ञानिक कृषि की ‘बैक्टर’ विधि

Bacter® Method of Scientific Farming

मानव, सभ्यता की शुरुआत से ही कृषि पर आश्रित रहा है. कृषि आज भी मानव सभ्यता के अस्तित्व और विकास का मूलाधार है. इंसान के जीवन को बेहतर बनने के लिए विज्ञान और तकनीक के विकास में प्रचुर भोजन और संसाधन कृषि से प्राप्त उपादानों की ही देन है. कृषि की स्थापना और उतरोत्तर प्रगति ने मानव को खानाबदोश से बदलकर स्थायी और निरंतर प्रगति करने वाला जीवन दिया है. इन सब की बदौलत आज हम प्रकृति की सीमाओं को झीना करके उन उद्देश्यों की ओर बढ़ते जा रहे हैं जिनकी कल्पना कभी हमारे पूर्वज किया करते थे. परन्तु इस द्वंद्व में ज्ञान-विज्ञान कुछ ख़ास लोगों तक सीमित होता गया. कृषि उन कुछ क्षेत्रों में से एक है, जो विज्ञान के सीधे प्रभाव से लगभग अनछुआ रह गया. किसान की वैज्ञानिक चेतना ना के बराबर है.

मनुष्य के इस विकासक्रम को जारी रखने के लिए कृषि और किसान को भी नवीनतम वैज्ञानिक समझ से जुड़ना बहुत जरुरी है.

पौधे जीवित जीव हैं. इंसान के विपरीत पौधे अनेक प्रजातियों से सम्बद्ध है, जिनमे हरेक की ख़ास परिस्थितिक और पोषण आवश्यकतायें हैं. पौधों को प्रकृति से सीधा मुकाबला करना होता है. पौधों के दोस्त और दुश्मन भी होते हैं, जिनका सामना प्रकृति में वे अकेले ही करते हैं. खेती में पौधों को इस लड़ाई के लिए इंसान का साथ मिल जाता है. इन दुश्मनों में इंसान के देखने की सीमा के बहार के, अति सूक्ष्म आकार के जीव, जिन्हें सूक्ष्मजीव कहा जाता है; खेती और पारिस्थितिकी में प्रमुख स्थान रखते हैं. ये सूक्ष्मजीव आज भी मानव के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी हैं, और सबसे बड़े वरदान भी.

वैज्ञानिक कृषि की ‘बैक्टर’ विधि में हम इन बिन्दुओं पर खेती की लागत को सीमित करने और उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं;

  • भूमि में अच्छी गुणवत्ता के आर्गेनिक मैटर यानि जीवांश की वृद्धि कम से कम खर्च में किस प्रकार संभव है?
  • अलग अलग प्रजाति के पौधों के लिए कौन कौन से पोषक तत्व , किस किस रूप में  और कितनी मात्रा में जरुरी हैं? इन सबके आसान और सस्ते विकल्प क्या हैं?
  • मिनिरल पोषक  कब कब प्रयोग करना चाहिये?
  • कौन से पोषक एक दूसरे का प्रभाव कम करते हैं और कौन से पोषक एक दूसरे का प्रभाव बढ़ाते हैं?
  • कौन से सूक्ष्म पोषक भूमि में डाले जाने चाहिए, और कौन से पोषक पत्तों पर स्प्रे करने चाहिए? क्या सूक्ष्म पोषक भी पौधों के लिए जहरीले होते हैं?
  • पौधे की किन अवस्थाओं पर सूक्ष्म पोषकों का प्रयोग समुचित परिणाम देता है?
  • कीट नियंत्रण के लिए प्रयोग किये जाने वाले कौन से रसायन बेहतर हैं और बिना घातक रसायनों के किस प्रकार रोगों का मैनेजमेंट/नियंत्रण किया जा सकता है?
  • कीट के जीवन चक्र की किन अवस्थाओं पर ज्यादा प्रभावी नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है?
  • कौन कौन से सूक्ष्मजीव फसलों के लिए घातक हैं? और उन्हें किस प्रकार सीमित किया जा सकता है?
  • पोषक तत्वों को प्राप्त करने के लिए सूक्ष्म जीव किस प्रकार किसान के सहायक हैं? इन्हें किस प्रकार कम से कम जटिलता के अधिकतम प्रभाव के लिए प्रयोग किया जा सकता है?
  • सहजीवी सूक्ष्मजीवों और पौधों के बीच के सम्बन्ध को किस प्रकार किसान की आय बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है?
  • किसान मित्र सूक्ष्म जीव फसलों के पोषण प्रबंधन में किस प्रकार किसान के खर्चो को कम कर सकते हैं?
  • रोगकारक सूक्ष्म जीवों, रोगकारक कीटों और मित्र सूक्ष्मजीवों के बीच की शत्रुता को किस प्रकार किसान के लाभ के लिए प्रयोग किया जा सकता है?
  • सूक्ष्म जीवों के माध्यम से खेती की जटिल और अनुत्तरित समस्याओं का समाधान किस प्रकार संभव है?
किसान के खेत में आने वाली नित नयी समस्याओं का सामना करने के लिए विज्ञान और तकनीक का समझदारी पूर्ण प्रयोग ही एकमात्र विकल्प है. भूमि की जैविक सक्रियता और उपजाऊ क्षमता बढ़ाते हुए, कम लागत में अधिकतम पैदावार ही किसान की खुशहाली का एकमात्र सूत्र है.

अधिक जानकारी के लिए 9926622048 पर WhatsApp करें या 7987051207 पर संपर्क करें.

‘बैक्टर’ विधि से सफ़लता पूर्वक उत्पादित कुछ फसलें

 

 

error: कृपया कॉपी न करें, बल्कि लिंक शेयर करें. धन्यवाद्!
%d bloggers like this: