पोटाश का पौधों की वृद्धि, विकास और पैदावार में योगदान

पोटेशियम का फर्टिलाइजर की तरह प्रयोग करने पर फसल के उत्पादन में वृद्धि होती है इस तथ्य से लगभग सभी किसान भाई वाकिफ हैं, परंतु उत्पादन में बढ़ोतरी क्यों होती है आइए इसके बारे में गहराई से समझते हैं। फर्टिलाइजर के रूपमे पोटाश की मोबिलिटी और उपलब्धता के विषय में जानने के लिए यहां पर क्लिक करें।

पोटेशियम का सबसे अहम रोल एंजाइम्स की क्रिया विधि को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए होता है। लगभग 60 प्रकार के एंजाइम जो पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी हैं, पोटेशियम के द्वारा एक्टिवेट होते हैं (कैसे एक्टिवेट होते हैं, उस विषय में चर्चा शुद्ध रूप से बायोलॉजी का टॉपिक हो जाएगा)। दूसरी ओर पोटैशियम पौधे के भीतर बफरिंग का कार्य करके पीएच को 7 से 8 के बीच रखता है। इसी पीएच रेंज के भीतर पौधे के एंजाइम सबसे ज्यादा क्रियाशील होते हैं। कोशिका के भीतर उपस्थित पोटाश की मात्रा यह निर्धारित करती है कि कितने एंजाइम क्रियाशील होंगे और उनकी क्रियाशीलता की दर क्या होगी अर्थात पोटेशियम की उपलब्धता से पौधों की वृद्धि सीधे तौर से प्रभावी प्रभावित होती है।

पौधों के श्वसन अंग यानी स्टोमेटा भी पोटैशियम की सहायता से ही खुलते और बंद होते हैं। स्टोमेटा द्वारा पौधे बाहरी वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन तथा जलवाष्प का आदान-प्रदान करते हैं। जल वाष्प के बाहर निकलने से पौधों में पानी का खिंचाव बनता है और पानी में घुले हुए पोषक पदार्थ जड़ों द्वारा ऊपर की ओर खींचे जाते हैं। इस तरह स्टोमेटा का पोषण के अवशोषण में महत्वपूर्ण रोल है। स्टोमेटा द्वारा गैसीय आदान-प्रदान प्रकाश संश्लेषण की मूलभूत क्रिया विधि का अंग है। स्टोमेटा के खुलने और बंद होने को उसके किनारों पर उपस्थित गार्ड सेल नामक दो कोशिकाओं के फूलने और पिचकने द्वारा नियंत्रित किया जाता है। पोटेशियम के गार्ड सेल के भीतर जाने से पानी भी उसके भीतर प्रवेश कर जाता है जिससे वह फूल जाती है और स्टोमेटा खुल जाता है जबकि पोटेशियम जब गार्ड सेल कर बाहर निकलता है तो पानी भी उसके साथ बाहर निकल आता है और इस प्रकार पिचकी हुई गार्ड सेल के कारण स्टोमेटा बंद हो जाता है।

पौधे में पोटेशियम की कम उपलब्धता होने पर गार्ड सेल इसे अपने भीतर से बाहर निकाल देती है और स्टोमेटा बंद रहते हैं। जमीन में पानी की कमी होने के साथ साथ अगर पोटेशियम की मात्रा भी कम है तो स्टोमेटा का खुलना और बंद होना बहुत धीमी गति से होता है ऐसी अवस्था में अगर पौधा जल वाष्प के उत्सर्जन को रोकने के लिए तेजी से स्टोमेटा बंद करना चाहे तो भी इसमें उसे घंटों का समय लग जाता है और इस दौरान पौधे से काफी मात्रा में पानी (जलवाष्प) हवा में उड़ जाता है जिससे पौधा जल्दी ही सूख जाता है। जमीन में पानी की कमी होने पर पौधों के भीतर का पोटेशियम परासरण दाब का निर्माण करता है जिस कारण पौधे जमीन से पानी का अवशोषण कर पाते हैं ।
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया विधि में पोटेशियम का महत्वपूर्ण योगदान है यह कोशिका के ऊर्जा संग्रह यानी एडिनोसिन ट्राई फास्फेट (एटीपी) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है प्रकाश संश्लेषण के द्वारा बनी हुई शर्करा फ्लोएम नामक पादप ऊतक द्वारा पूरे पौधे के विभिन्न अंगों तक पहुंचाई जाती है। इस कार्य के लिए एटीपी का प्रयोग होता है। अगर एटीपी की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं है तो प्रकाश संश्लेषण से बनी शर्करा पत्ती में ही इकट्ठी होती रहती है और प्रकाश संश्लेषण की गति धीमी कर देती है। ऐसा होने पर दानों का आकार छोटा रह जाता है।

पोटेशियम अन्य पोषक तत्वों के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नाइट्रेट, फास्फेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम और अमीनो एसिड के परिवहन के लिए पोटैशियम जरूरी है।
हम सभी यह तो जानते ही हैं कि नाइट्रोजन से प्रोटीन का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया में भी पोटेशियम का महत्वपूर्ण रोल है। पोटेशियम की कमी होने पर नाइट्रोजन से अमीनो एसिड और प्रोटीन बनने की क्रिया धीमी हो जाती है। पोटेशियम की कमी होने पर प्रोटीन के पूर्ववर्ती पदार्थ यानी नाइट्रेट, अमाइड, अमीनो एसिड इत्यादि कोशिका में इकट्ठे हो जाते हैं जो कीटों और रोग कारक सूक्ष्म जीवों को आकर्षित करने का कार्य करते हैं। नाइट्रेट से प्रोटीन बनने की क्रिया में नाइट्रेट reductase नामक एंजाइम का महत्वपूर्ण रोल है जिसके निर्माण और क्रियाशीलता के लिए पोटेशियम जरूरी है। ठीक इसी प्रकार स्टार्ट सिंथेज नामक एंजाइम पौधों में का संश्लेषण द्वारा बनी शर्करा से स्टार्च के निर्माण के लिए जिम्मेदार है। यह एंजाइम भी पोटेशियम द्वारा एक्टिवेट होता है। अब आप समझ ही गए होंगे कि पोटेशियम की कमी होने पर पौधे में स्टार्च की मात्रा कम हो जाएगी और इसके पूर्व वर्ती यानी शर्करा की मात्रा पौधे में बढ़ जाएगी यह शर्करा कीटों और रोगकराक सूक्ष्म जीवों को अपनी और आकर्षित करने का कार्य करेगी।

इस पूरी चर्चा से यह समझा जा सकता है की पोटेशियम पौधे के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवयवों में से एक है। इसका रोल भूमि से पोषक तत्वों के अवशोषण, प्रकाश संश्लेषण, पौधे के विभिन्न भागों में शर्करा के परिवहन और स्टार्ट निर्माण के लिए होता है। इसकी कमी होने पर पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और फसल के उत्पादन में कमी होती है उत्पाद की गुणवत्ता भी कमजोर रह जाती है।

पोटाश की कमी के लक्षण पौधों में आसानी से दिखाई नहीं देते। सिर्फ अत्यधिक कमी होने पर ही पोटेशियम के लक्षण फसल में दिखाई देते हैं लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है। जब पौधा वृद्धि कर रहा होता है तब पोटेशियम की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, अगर उस वक्त पोटेशियम पौधे को उपलब्ध नहीं होता तो उत्पादन प्रभावित होता है। और बीमारी आदि से लड़ने का खर्च भी बढ़ जाता है।


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