सूक्ष्मजीवों का खेती में अप्रतिस्थापनीय स्थान है, इनकी जगह कोई और चीज नहीं ले सकती.  सही पोषण प्रबंधन के साथ फसल में प्रयोग किये गए सूक्ष्मजीव शानदार परिणाम देते हैं और खेती का अनावश्यक खर्च  घटाने के लिए अमूल्य साथी हैं.

इस फसल में सही पोषण के साथ कल्चर द्वारा बीजोपचार किया गया. ये लाभ दायक सूक्ष्म जीव भी पौधे के साथ साथ बढ़ते हैं और फसल को अलग ही रंगरूप में ले आते हैं.भूमि में पोषक तत्वों की सही मात्रा डाली गयी. २७ दिन की अवस्था में सूक्ष्मपोषक तत्व 05234 के साथ स्प्रे किये गए (कीट नाशक ट्राईएजोफोस भी लिया गया ). किसी भी अवस्था में रासायनिक फफूंद नाशी का प्रयोग नहीं किया गया. किसी खरपतवारनाशी का प्रयोग नहीं किया गया और न ही किसी वृद्दि नियंत्रक या टॉनिक का. यह सोयाबीन ३२ दिनों का है.

सोयाबीन की जड़ों में लाभदायक सूक्ष्म जीव (राइजोबियम) गठानें बनाता है जो वास्तव में नाइट्रोजन का रूप बदलने की फैक्ट्री है. इन गठानो का पोषण पौधा करता है, और बदलने में इनके भीतर पलने वाले राइजोबियम हवा से नाइट्रोजन ले कर एक जटिल क्रियाविधि द्वारा उसे अमोनियम रूप में बदलते हैं जिससे अंततः पौधा एमिनो अम्ल और प्रोटीन (और एंजाइम) का निर्माण करता है. इस प्रकार निर्मित प्रोटीन पर जंतु जीवन निर्भर है, क्योंकि जंतु हवा से प्रोटीन का निर्माण नहीं कर सकते.

सोयाबीन की जड़ों में लाभदायक सूक्ष्म जीव, राइजोबियम की गठानें, जिनका पोषण पौधा करता है, और बदलने में इनके भीतर पलने वाले राइजोबियम हवा से नाइट्रोजन ले कर एक जटिल क्रियाविधि द्वारा उसे अमोनियम रूप में बदलता है जिससे अंततः पौधा एमिनो अम्ल और प्रोटीन का निर्माण करता है, जिसपर जंतु जीवन निर्भर है.

दिनेश जी आर्य (पाटीदार), बैक्टर विधि से उगाई जा रही अपनी सोयाबीन की फसल के साथ (JS 2034)

दिनेश जी आर्य (पाटीदार) रंगवासा, राऊ, बैक्टर विधि से उगाई जा रही अपनी सोयाबीन की फसल के साथ (JS 9560)

बैक्टर विधि से उगाई हुई ३२ दिन की सोयाबीन (JS 2034)

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