परिचय, कार्य और कमी के लक्षण

मैग्नीशियम पौधों के मुख्य पोषक तत्वों में आता है और पौधे के वजन का 0.2 से 0.4 प्रतिशत भाग बनाता है. रासायनिक रूप से मैग्नीशियम सल्फर और क्लोरीन के साथ घुलनशील योगिक बनाता है,  और जमीन से आसानी से लीच हो जाता है. पानी के साथ और भूसे के रूप में लगातार लीचिंग के कारण फसलों में इसकी कमी के लक्षण आसानी से देखे जा सकते हैं.

इसकी कमी के लक्षण हल्की रेतीली मिट्टी में (जिनका पीएच एसिडिक हो) ज्यादा दिखाई देते हैं. जीवांश मैग्नीशियम की लीचिंग को रोकने का कार्य करता है.

मैग्नीशियम का प्रमुख कार्य प्रकाश संश्लेषण के केंद्र क्लोरोफिल की क्रियाशालता के मुख्य हिस्से के तौर पर है. मैग्नीशियम  क्लोरोफिल मॉलिक्यूल के केंद्र में स्थित होता है और प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मैग्नीशियम की कमी से पौधों की पत्तियां पीली पड़ती हैं और क्लोरोफिल नष्ट होता है. इसकी कमी के लक्षण पुरानी पत्तियों पर पहले दीखते हैं. अगर भूमि में मग्निशियम की कमी है, और नई पत्तियों में क्लोरोफिल के निर्माण के लिए मैग्नीशियम उपलब्ध नहीं है तो पौधा निचली पत्तियों में क्लोरोफिल को नष्ट कर, इससे प्राप्त मैग्नीशियम को नई बन रही पत्तियों की ओर भेजता है.

प्रकाश संश्लेषण के लिए जिम्मेदार क्लोरोफिल की क्रियाशीलता मैग्नीशियम पर निर्भर है. (इस वर्णक का केन्द्रीय अणु मैग्नीशियम है)

अगर पोटेशियम और मैग्नीशियम का असंतुलन है यानी अधिक मात्रा में पोटेशियम दिया गया है और मैग्नीशियम कम मात्रा में दिया गया है तो भी मैग्नीशियम की कमी के लक्षण दिखाई देते हैं.

मैग्नीशियम पौधों में कई प्रकार के एंजाइम की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक तत्व है. कार्बन स्थिरीकरण में  महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले को एंजाइम रूबीस्को (RuBisCO) और फोस्फोइनोलपायरुबेट कार्बोक्सीलेज (PEPC) की क्रियाशीलता, मैग्नीशियम पर निर्भर करती है.  मैग्नीशियम की कमी से पौधे कि प्रकाश संश्लेषण क्रिया और उसके आगे की कार्बन स्थिरीकरण की क्रिया बाधित होगी.

मैग्नीशियम का एक प्रमुख कार्य राइबोसोम नामक कोशिकांग की स्थिरता बनाये रखना है. राइबोसोम  वे कोशिकांग है जो प्रोटीन और एंजाइम संश्लेषण के लिए उत्तरदाई हैं. अर्थात मैग्नीशियम की कमी से प्रोटीन और एंजाइम का निर्माण भी प्रभावित होगा और पौधे जल्दी से वयता यानी बुढ़ापे को प्राप्त हो जाएंगे इसी कारण मैग्नीशियम की अत्यधिक कमी होने पर पत्तियां झड़ना, पौधों पर विभिन्न स्थानों पर घाव होना आदि लक्षण भी दिखाई देते हैं.  अत्यधिक कमी होने पर छोटे-छोटे और कड़े फलों का निर्माण करते हैं. मैग्नीशियम की कमी के लक्षण और chlorophyllकी कमी के कारण या वायरस इन्फेक्शन होने के लक्षण जैसे भी दिखाई देते हैं.

मैग्नीशियम के स्त्रोत

मैग्नीशियम की पूर्ति के लिए बेसल के तौर पर डोलोमाइट चूना पत्थर का पिसा हुआ पाउडर प्रयोग किया जा सकता है.  परन्तु यह मिट्टी का पीएच बढ़ाता है, इसलिए अधिक pH वाले खेतों के लिए उपयुक्त नहीं है. जब पीएच करेक्शन की जरूरत ना हो तो मैग्नीशियम सल्फेट घुलित रूप में दिया जाने वाला सबसे आसानी से उपलब्ध रसायन है.  मैग्नीशियम सल्फेट देने पर पौधे को घुलित रूप में सल्फर भी प्राप्त होता है.

कपास के खेतों में मैग्नीशियम की खास कमी दिखाई देती है  मैग्नीशियम की कमी से इसकी पत्तियां पहले पीले और फिर लाल रंग की होने लग जाती है. लाल धारियों के रूप में  ठीक यही लक्षण मक्के और गन्ने की फसल में भी देखे जा सकते हैं. सोयाबीन की पुरानी पत्तियां पीली पड़ने लग जाती हैं यह भी मैग्नीशियम की कमी से होता है. असली में मैग्नीशियम की कमी से भूसे में भी मैग्नीशियम की मात्रा कम जाती है और पशुओं को खिलाए जाने पर उनकी दूध उत्पादन की क्षमता कम हो जाती है. अत्यधिक कमी होने पर उनकी हड्डियां भी कमजोर होती जाती है.

खनिज के रूप में मैग्नीशियम कैसीटेराइट रूप में मिलता है यह मैग्नीशियम सल्फेट हाइड्रेटेड होता है. कैसीटेराइट मुख्य रूप से जर्मनी द्वारा उत्पादित किया जाता है. मैग्नीशियम ऑक्साइड भी मैग्नीशियम का स्रोत है, इसमें  56 प्रतिशत तक मैग्नीशियम होता है, परंतु यह घुलनशील नहीं होता है. खनिजों का प्रयोग करके सिंथेटिक रूप से तैयार किया गया मैग्नीशियम सल्फेट सबसे आसानी से उपलब्ध मैग्नीशियम का स्रोत है मैग्नीशियम सल्फेट जिसमें पानी के सात अणु जुड़े हुए होते हैं, 9% मैग्नीशियम धारित करता है और इसे एप्सम साल्ट के नाम से भी जाना जाता है. schoenite  पोटेशियम सल्फेट मैग्नीशियम सल्फेट का संयुक्त रुप है इसमें भी लगभग 6% मैग्नीशियम होता है. मैग्नीशियम नाइट्रेट में 9% मैग्नीशियम पाया जाता है और यह पानी में पूर्णतः घुलनशील है. डोलोमाइट; मैग्नीशियम कार्बोनेट कैल्शियम कार्बोनेट का मिश्रित रूप है जिसमें स्रोत के अनुसार 4 से 6% तक मैग्नीशियम हो सकता है परंतु यह पानी में घुलनशील नहीं होता है.  क्षारीय मृदा में घुलनशीलता और भी कम हो जाती है. इसका प्रयोग करने के लिए कंपोस्ट अच्छी मात्रा में खेत में डालना चाहिए.

 

आइये कपास के उदाहरण से मैग्नीशियम की कमी को पहचानें-

कपास में मैग्नीशियम की कमी के लक्षण. लाल सिरे और पत्तियों का जलना (नेक्रोसिस). (नोट- पौधों में फोस्फोरस सहित अन्य पोषकों की मिली जुली कमी भी हो सकती है)

कपास में मैग्नीशियम की कमी के लक्षण. लाल सिरे और पत्तियों का जलना (नेक्रोसिस). (नोट- पौधों में फोस्फोरस सहित अन्य पोषकों की मिली जुली कमी भी हो सकती है)

संतुलित पोषण, कम्पोस्ट और मोबिलाइजर सूक्ष्मजीवों के साथ उग रही कपास-

संतुलित पोषण, कम्पोस्ट और मोबिलाइजर सूक्ष्मजीवों के साथ उग रही कपास. सूक्ष्मजीव पोषक तत्वों की उपलब्धता और जैविक गतिशीलता बनाये रखने में मदद करते हैं.

 

संतुलित पोषण, कम्पोस्ट और मोबिलाइजर सूक्ष्मजीवों के साथ उग रही कपास. सूक्ष्मजीव पोषक तत्वों की उपलब्धता और जैविक गतिशीलता बनाये रखने में मदद करते हैं.

कितनी थ्रिप्स? पहेली बूझें

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: कृपया कॉपी न करें, बल्कि लिंक शेयर करें. धन्यवाद्!
%d bloggers like this: