सोयाबीन बारिश के समय लगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसल है. यह मूल रूप से लेग्यूम यानि दलहनी फसल है जो तिलहन और प्रोटीन स्त्रोत दोनों के तौर पर इस्तेमाल की जाती है. प्रोटीन और वसा का प्रचुर स्त्रोत होने के कारण विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव और कीट सोयाबीन पर आश्रित होते हैं जिससे इसकी पैदावार उल्लेखनीय रूप से प्रभावित होती है.

सोयाबीन में बीजों के अंकुरण के समय होने वाला फंगल इन्फेक्शन काफी नुकसान पहुंचाता है. इस समस्या के समाधान के तौर पर विभिन्न रासायनिक फफूंद रोधी उत्पादोन से बीजोपचार किया जाता है. इनका असर कुछ दिनों तक ही सीमित रहता है और लगातार प्रयोग करने पर रोगकारक फंगस इससे लड़ने के लिए अडॉप्ट हो जाती हैं और धीरे धीरे केमिकल फफूंदनाशी का प्रभाव कम होने लगता है. नीचे के चित्रों में रासायनिक फफुन्द्नाशी से उपचारित २१ दिन के सोयाबीन देख सकते हैं.

रासायनिक फफुन्द्नाशी से उपचारित सोयाबीन (२१ दिन की फसल)

रासायनिक फफुन्द्नाशी से उपचारित सोयाबीन (२१ दिन की फसल)

रासायनिक फफुन्द्नाशी से उपचारित सोयाबीन (२१ दिन की फसल)

 

रासायनिक उपादानों के ठीक विपरीत सूक्ष्मजीव भूमि में गुणित होने की क्षमता रखते हैं, यानि अनुकूल परिस्थितियों में अपनी संख्या बढ़ाते हैं. यह क्षमता नुकसानदायक और लाभकारी, दोनों प्रकार के सूक्ष्मजीवों में होती है. सोयाबीन के लिए प्रमुख रूप से उपयोगी सूक्ष्मजीव ट्राईकोडर्मा और राइजोबियम है. फॉस्फेट घोलक सुक्षम्जीव और पोटाश mobilizer बैक्टीरिया अगर प्रयोग किये जाते हैं तो पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती है.

ट्राईकोडर्मा, जो की स्वयं एक फंगस है और अन्य फंगस को अपना आहार बनाता है, सोयाबीन की फसल में फंगस के इन्फेक्शन से बचाव के लिए बहुत प्रभावी है. इसे बीजोपचार और अन्य तरीकों से प्रयोग किया जा सकता है. परिणाम के लिए एकमात्र शर्त उत्पाद की अच्छी गुणवत्ता है.

दलहनी फसल होने के कारण सोयाबीन विशिष्ट प्रकार के राइजोबियम के साथ संबंध बना कर अपनी जड़ों के भीतर उसे स्थान (रूट नोडुल) और पोषण प्रदान करता है. बदले में राइजोबियम हवा से नाइट्रोजन के कर उसे पौधे के प्रयोग लायक अमोनियम रूप में परिवर्तित करके सोयाबीन के पौधे को उपलब्ध करवाता है. 

प्रस्तुत चित्र २१ दिन के सोयाबीन के हैं जिसमे ट्राईकोडर्मा और राइजोबियम का इस्तेमाल बीजोपचार में किया गया है. यह दोनों सूक्ष्मजीव रोगों से लड़ने में किसान का खर्चा कम करने के साथ साथ भूमि की उर्वरता और रोगरोधी क्षमता बढ़ाते हैं. पौधे के जीवनचक्र की विभिन्न अवस्थाएं इन सूक्ष्मजीवों के कारण सुचारू रूप से गतिमान होती हैं और वृद्धि प्रेरक और नियंत्रक रसायनों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं पड़ती. कृषि उत्पाद की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी प्राप्त होती है.

राइजोबियम और ट्राईकोडर्मा सोयाबीन (JS-9560) (२१ दिन की फ़सल)

राइजोबियम और ट्राईकोडर्मा सोयाबीन (JS-2034) (२१ दिन की फ़सल)

राइजोबियम और ट्राईकोडर्मा सोयाबीन (JS-9560) (२१ दिन की फ़सल)

सूक्ष्मजीवों के खेती में प्रयोग के विषय में अधिक जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए फार्म को भरकर हमसे जुड़ सकते हैं.


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