प्याज हमेशा से किसानों के लिए लुभावनी फसल रही है. कुछ कुछ सालों के अंतराल पर इसकी कीमतों में उछाल देखा जाता है. भारतीय उपमहाद्वीप के भोजन में प्याज का खास महत्व है, इसलिए हमेशा ही इसकी डिमांड बनी रहती है.

प्याज की खेती के कई तरीके प्रचालन में हैं. इसकी पौध नर्सरी में तयार की जाती है या मशीन द्वारा खेत में सीधे बीज भी बोये जाते हैं. कुछ किसान छोटे प्याज भी बीज की तरह इस्तेमाल करते हैं.

प्याज की फसल में सहजीवी सूक्ष्म जीव अच्छे परिणाम देते हैं. ये सूक्ष्म जीव फसल को फफूंद के आक्रमण से बचाने के लिये और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश सहित सूक्ष्म तत्वों को संशेल्षित, घुलनशील, और गतिमान करने में अपना योगदान देते हैं.

Bacter के सूक्ष्मजीवों के साथ रोप विधि से उगाया गया ७० दिन का प्याज ↑. यह चित्र ७० दिन की प्याज का है जो पहली बार खेती लायक जमीन (हल्की जमीन) में उगाई जा रही है. इस फसल में सूक्ष्मजीवो का प्रयोग किया गया है.

मशीन और सूक्ष्मजीवों द्वारा प्याज की खेती

मशीन से सीधे खेत में बुवाई करके भी प्याज की अच्छी पैदावार ली जा सकती है. सीधे बुवाई से रोप लगवाने की जद्दोजहद और खर्च तो बचता है परन्तु पौधे फंगस से बचाव बहुत जरुरी हो जाता है. इस काम के लिए लाभदायक सूक्ष्मजीव बहुत मददगार हैं.




क्रमशः…

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