मौसम और बाजार से लड़ते हुए अपनी खेती को कीटों और रोगकारक सूक्ष्मजीवों से बचाना किसान के लिए सबसे बड़ा चेलेंज होता है.

मुख्य रूप से कीट जनित व्याधियां किसान को पेस्टिसाइड की ओर मुड़ने और जेब ख़ाली करने के लिए मजबूर कर देते हैं. विगत वर्षों में अंधाधुंध pesticides के अंधाधुंध इस्तेमाल ने  कीटों के प्राकृतिक नियंत्रकों  तक को ख़त्म कर दिया है. यह जानना बहुत जरुरी है की प्रकृति में एक जीव ही दुसरे जीव का भोजन होता है. इसी प्रकार व्याधि जनक कीटों को खाने वाले किसान मित्र कीट भी होते हैं, और ये कीट भी पेस्टिसाइड से मारे जाते हैं.

पेस्टिसाइड के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि यह अपने टारगेट, खास ग्रुप के कीटों का सफाया कर देता है, जिससे अन्य ग्रुप के कीटों को बढ़ने और फैलने का मौका मिल जाता है और उनकी जिससे उनकी भरमार हो जाती है. इसका सबसे बढ़िया उदाहरण सफ़ेद मक्खी की पापुलेशन में हुई अभूतपूर्व वृद्धि है. थ्रिप्स बढ़ने का एक कारण यह भी है. रस चूसक कीट न सिर्फ पौधे की वृद्धि रोकते हैं, उनका रंग रूप बदल लेते हैं, और कई प्रकार की वायरस जनित समस्याओं के वाहक है.

सोयाबीन का यलो मोजोइक वायरस (पत्तियों पर पीले सुनहरे धब्बे) सफ़ेद मक्खी द्वारा फैलने वाली बीमारी है जो सोयाबीन की उत्पादकता लगभग ख़त्म कर देती है.

रसचूसक कीटों का पेस्टिसाइड द्वारा नियंत्रण आसन नहीं है. कई प्रकार के घातक रसायन प्रयोग करने पड़ते हैं जो फसल की उत्पादकता को भी कम कर देते हैं.

यह जरुरी है कि पेस्टिसाइड का इस्तेमाल आखिरी हथियार के तौर पैर हो. कीट नियंत्रण की अन्य विधियों की जानकारी और खेती में उनका प्रयोग किसान के खुद के स्वास्थ्य और आर्थिक दृष्टी से लाभकारी होता है.

यह भी जानना जरुरी है कि कीट नियंत्रण के लिए, धतूरा, अकड़ा, बेशरम आदि पौधों का प्रयोग करना भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि इनमे मानव के लिए अत्यंत घातक विष होते है (इन पौधों की इकठ्ठा करना, पत्तियां तोडना, पीसना आदि करते समय यह मुख, आंख औत त्वचा के संपर्क में न आने दें).

आइये कीट नियंत्रण की पेस्टिसाइड रहित सफल विधियों पर एक नजर डालें;
१- रंग द्वारा कीटों को आकर्षित करना
२- गंध द्वारा कीटों को आकर्षित करना

३-प्रकाश द्वारा कीट नियंत्रण

कीट फूलों के भ्रम में पीले और नीले रंग की पन्नी को ओर आकर्षित होते हैं. रंग द्वारा कीट आकर्षित करने के लिए पीले और नीले रंग के स्टिकी ट्रैप का इस्तेमाल होता है. रंग द्वारा कीटों को आकर्षित करना बहुत सक्षम विधि है जो फल मक्खी एवं रस चूसक कीटों, जैसे एफिड और सफ़ेद मक्खी, को आकर्षित करता है. स्टिकी ट्रैप का चिपचिपा पदार्थ कीटों को चिपका लेता है और कीट मारे जाते हैं.

गंध द्वारा कीट नियंत्रण के लिए सेक्स फेरोमोन का इस्तेमाल किया जाता है. यह काफी विशिष्ट रसायन हैं जो तिएफ टारगेट कीट को ही आकर्षित कर सकते हैं. सेक्स फेरोमोन वे उड़नशील जैव रसायन हैं जो कीट प्रजनन के समय विपरीत लिंग के कीटों को आकर्षित करने के लिए प्रयोग करते हैं. इन हॉर्मोन का उपयोग कीट नियंत्रण में सफलता पूर्वक किया जाता है. इसे विधि को lure यानि प्रपंच नाम दिया गया है. निषेचन के लिए नर और मादा कीट दोनों की आवश्यकता होती है. अगर एक भी औप्लाब्ध हो तो आगे की पीढियां नहीं चल पाएंगी. यह विधि इसी सिद्धांत पैर काम करती है.

विभिन्न प्रकार की फलमक्खी का नियंत्रण फेरोमोन ट्रैप द्वारा आसानी से किया जाता है. कपास के पिंक बोल वर्म और चने, टमाटर की सुंडियों के नियंत्रण के लिए भी ये ट्रैप आसानी से उपलब्ध हैं.

प्रकाश प्रपंच से तो किसान भली प्रकार परिचित हैं ही. रात्रिचर कीट जैसे मोथ, इसमें आसानी से अकर्चित किये जा सकते हैं. किसी प्रकाश स्त्रोत के नीचे पानी भरकर राख देने से कीट उनसे गिराकर मर जाते हैं.

 

क्रमश…

 

 

 

 

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