गन्ना एक लम्बी अवधि की फसल है. एक बार बुवाई के पश्चात २-३ बार कटाई की जा सकती है. गन्ना पौधों के C-4 परिवार का सदस्य है. C-4 पौधे ज्यादा बेहतर तरीके से सूरज की रौशनी का इस्तेमाल कर सकते हैं इसलिए तेजी से बढ़ते हैं. तेज ग्रोथ उसके द्वारा जमीन से पानी और पोषक तत्वों के तीव्र अवशोषण को प्रेरित करती है इसलिए गन्ना जमीन को तेजी से पोषक तत्वों से डिप्लीट कर देता है.

गन्ने की शुरूआती अवस्था में और कटाई के बाद के समय में सहफसली खेती की जा सकती है. इसके लिए उस फसलो का चुनाव करना चाहिए जो ३-४ महीने में पक कर तैयार हो जाएँ. अधिक रिवॉर्ड देने वाली एक ऐसी फसल है- डॉलर चना. जो लोग नवम्बर के आसपास गन्ने की शुरुआत करते हैं वो डॉलर चने के साथ गन्ने की सहफसली खेती कर सकते हैं.

गन्ने की फसल द्वारा भूमि का अत्यधिक शोषण से बचने के लिए उचित मात्रा में पोषक तत्व, कंपोस्ट खाद और लाभदायक सूक्ष्मजीवों का खेत में उपस्थित होना बहुत जरुरी है. गन्ने की नाइट्रोजन आवश्यकता का ५०% तक पूरा कर सकता है यानि उरिया की मात्रा को सीधे ही आधा किया जा सकता है वह भी उत्पादन में बिना ह्रास के.

गन्ने की फसल के लिए उपयोगी सूक्ष्मजीव:

1- ग्लूकॉनोबैक्टर: यह गन्ने का खास सहजीवी बैक्टीरिया है। यह गन्ने की कुल नाइट्रोजन जरूरत का 50% तक उपलब्ध करवाता है यानी नाइट्रोजन उर्वरकों जैसे यूरिया की खपत आधी की जा सकती है।

2- ट्राइकोडर्मा: यह पौध मित्र फंगस, रोगकारक फफूंद से पौधे को सुरक्षा देता है।

3- फॉस्फेट घोलक सूक्ष्मजीव: जमीन में डाला गया घुलनशील फोस्फेट जैसे डीएपी, कुछ समय उपरांत जमीन के कैल्शियम से क्रिया करके पौधों के लिए अनुपयोगी रुप, कैल्शियम फॉस्फेट में बदल जाता है।फॉस्फेट घोलक सूक्ष्मजीव इसे पुनः पौधों के लिए उपयोगी रूप में बदल देते हैं। रॉक फॉस्फेट और सुपर फॉस्फेट जैसे कम खर्चीले फॉस्फेट उर्वरकों के साथ फॉस्फेट घोलक सूक्ष्मजीवों का प्रयोग बेहतर परिणाम देता है।

4- पोटाश घोलक सूक्ष्मजीव: गन्ने के लिए पोटाश का विशेष महत्व है। कई जमीनों में पोटाश प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है परन्तु पौधों के लिए अनुपयोगी रुप में। पोटाश घोलक सूक्ष्मजीव अनुपलब्ध पोटाश को पौधों द्वारा प्रयोग किये जाने वाले रूप में बदल कर फसल के उत्पादन में वृद्धि करते हैं।

उपरोक्त सूक्ष्मजीव मृदा की जलधारण क्षमता और पोषक तत्व रोकने की क्षमता में भी वृद्धि करते हैं। स्वस्थ जीवित भूमि फसलों की अच्छी और निरोग पैदावार के लिए जरूरी है।

क्रमशः…

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