किसानों पर अपनी भूमि की उपजाऊ क्षमता बनाये रखने का दबाव और जिम्मेदारी है…

पौधों की अपनी अलग दुनिया है.. उनके दोस्त भी हैं दुश्मन भी. खाद्य श्रंखला के शीर्ष पर बैठा मनुष्य पौधों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निर्भर है. पौधों से मानव को को भोजन, औषधियां, कपडे और लकड़ी (घर बनाने और उर्जा के लिय)  जैसी मूलभूत चीजें मिलती हैं, जिनके बिना मानव का जीवन और प्रगति असंभव है. खेती की शुरुआत इंसान की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण कदम था. कृषि आज भी एक बड़ी इंसानी आबादी की आजीविका का स्त्रोत है.

पौधे अपना पोषण भूमि से प्राप्त करते हैं. लगातार खेती करने से फसल के रूप में पोषक तत्व भूमि से निकाल लिए जात्ते हैं और भूमि में पोषक तत्वों की मात्रा कम होती जाती है. अत्यधिक औद्योगीकरण से प्रेरित हुआ मौसमी बदलाव भी खेती के लिए एक बडी चुनौती है. दूसरी ओर कार्पोरेट फार्मिंग छोटे किसानों को अपने उत्पाद कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर करता है. किसानों पर अपनी सीमित भूमि की उपजाऊ क्षमता बनाये रखने की जिम्मेदारी है.

इस बदलते परिवेश और बढते खर्चे के साथ घटती उत्पादकता के दौर में फसलों की पोषण आवश्यकताओं और उसके सहयोगी और रोगकारक सूक्ष्मजीवों को समझना बहुत जरूरी हो गया है. Bacter इसी समझ को विकसित करने और  किसानों तक इसे पहुँचाने के लिए कम करता है.

पौधों का पोषण, उनका लाभदायक और हानिकारक सूक्ष्मजीवों के साथ अंतर्संबंध और इसे लाभदायक रूप में परिवर्तित कर पाने की क्षमता, खेती को सीमित खर्चे में उत्पादकता को अधिकतम संभव स्तर तक पहुंचा सकती है. यह विधि प्रयावरण के अनुकूल तो है ही, साथ ही खेत की उत्पादन क्षमता में भी उत्तरोत्तर वृद्धि करती है. खेती को सस्टेनेबल बनाने और खेत की उम्र बढ़ाने के लिए किसान भाई  Bacter® द्वारा विकसित तरीके अपना सकते हैं.

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पौधों के जीवन में सूक्ष्मजीवों की हिस्सेदारी समझने के लिए Bacter से जुड़िये

वैज्ञानिक खेती
सफल बागवानी
फ़ास्ट-कम्पोस्टिंग

डॉलर चना- कमायें घना


चना भारत की प्रमुख दलहनी फसल है. इसमें भी डॉलर चने की खेती, एक्सपोर्ट ओरिएंटेड होने के कारण खासी लोकप्रिय हो रही है. अच्छा उत्पादन और अच्छा रेट डॉलर चने की खेती का रकबा बढ़ने के प्रमुख प्रेरक रहे हैं. पर दलहनी फसल होने से इस फसल में समस्याओं का अम्बार लगता जा रहा है. चने और डॉलर चने की समस्याओं से निजात के लिए bacter से संपर्क करें (whatsApp 9926622048)…

सीमित खर्चा और पपीते की बेहतर फसल


मीठे स्वाद के मार्केटेबल पपीते को गूदे के रंग के आधार पैर मुख्यतः दो मूल किस्मों में बांटा जा सकता है; पीले गूदे वाली और लाल-नारंगी गूदे वाली किस्मे. लाल-नारंगी गूदे वाली किस्मे ज्यादा आकर्षक और स्वादिष्ट समझी जाती हैं और अच्छी मार्केट डिमांड होती है. फिलहाल इसका बीज भारत में आयत किया जाता है…..

तरबूज: जल्दी और ज्यादा


इसकी आइसबॉक्स किस्में उपयुक्त मौसम में ७०-८० दिन में पक कर तैयार हो जाती है. हलाकि अच्छा उत्पादन लेने के लिए मल्चिंग और ड्रिप की व्यवस्था होना जरुरी है. जबकि बड़े फल वाली और (धारीदार) बिना प्लास्टिक मल्च के भी अच्छा उत्पादन देती है, क्योकि इसका नेचर vigerous होता है…..

गन्ना: लाखों किसानों की पसंद


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गन्ना एक लम्बी अवधि की फसल है. एक बार बुवाई के पश्चात २-३ बार कटाई की जा सकती है. गन्ना पौधों के C-4 परिवार का सदस्य है.   C-4 पौधे ज्यादा बेहतर तरीके से सूरज की रौशनी का इस्तेमाल कर सकते हैं इसलिए तेजी से बढ़ते हैं….

लुभावना प्याज


प्याज हमेशा से किसानों के लिए लुभावनी फसल रही है. कुछ कुछ सालों के अंतराल पर इसकी कीमतों में उछाल देखा जाता है. भारतीय उपमहाद्वीप के भोजन में प्याज का खास महत्व है, इसलिए हमेशा ही इसकी डिमांड बनी रहती है….

Bacter से लाभान्वित किसान

रेगिस्तान से जुड़े खेतों से ले कर भरपूर सिंचाई के मैदानों तक bacter से जुड़े मेहनती और समझदार किसान ही हमारी प्रेरणा है
मनोहर सिंह राजपुरोहित, रतलाम, मध्यप्रदेश

मनोहर सिंह राजपुरोहित, रतलाम, मध्यप्रदेश

उत्पादक एवं बागवानी-पालीहाउस कृषि मार्गदर्शक
राज नंदवाना, अंता, राजस्थान

राज नंदवाना, अंता, राजस्थान

उत्पादक: गेहूं, सोयाबीन, लहसुन
दयानंद पाटीदार, करोंदिया, मध्यप्रदेश

दयानंद पाटीदार, करोंदिया, मध्यप्रदेश

उत्पादक: पपीता, डॉलर चना, प्याज, कपास, तरबूज, गन्ना

दयानंद जी पाटीदार निमाड़ (करोंदिया) के मेहनती किसान हैं. बहुत उपजाऊ जमीनें न होने पैर भी कठिन मेहनत के बल पर साल भर में कई फसलें उगाते हैं. सूक्ष्मजीवों की क्षमता को प्रत्यक्ष समझने के लिए इनसे बेहतर कोई नहीं.

गिरधर पाटीदार, झापडी, मध्यप्रदेश

गिरधर पाटीदार, झापडी, मध्यप्रदेश

उत्पादक: डॉलर चना, मक्का, सोयाबीन, खीरा, करेला,
संपत भार्गव, बीकानेर, राजस्थान

संपत भार्गव, बीकानेर, राजस्थान

उत्पादक: मूंगफली, मौसमी फल और सब्जियां

अदम्य जिजीविषा के धनी संपत भार्गव जी अपनी मेहनत और समझदारी के बल पर रेगिस्तान की विपरीत परिस्थितियों (मिट्टी से ले कर हवा और तापमान सब प्रतिकूल होने पर भी) से लड़कर कृषि का अच्छा उत्पादन लेते हैं.

श्याम पाटीदार, छोटी खरगोन, मध्यप्रदेश

श्याम पाटीदार, छोटी खरगोन, मध्यप्रदेश

उत्पादक: तरबूज, डॉलर चना, कपास, मक्का
अजय पाटीदार, करोंदिया, मध्यप्रदेश

अजय पाटीदार, करोंदिया, मध्यप्रदेश

उत्पादक: तरबूज, टमाटर, गन्ना, डॉलर चना, खीरा
चंचल पाटीदार, ओदडिया, मध्यप्रदेश

चंचल पाटीदार, ओदडिया, मध्यप्रदेश

उत्पादक एवं कृषि सलाहकार
गणेश पाटीदार, करोंदिया, मध्यप्रदेश

गणेश पाटीदार, करोंदिया, मध्यप्रदेश

उत्पादक: नीबू, चना, सोयाबीन
रामेश्वर पाटीदार, छोटी खरगोन, मध्यप्रदेश

रामेश्वर पाटीदार, छोटी खरगोन, मध्यप्रदेश

उत्पादक: टमाटर, डॉलर चना, करेला, कपास

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पुरुषोत्तम पाटीदार, राऊ, मध्यप्रदेश

पुरुषोत्तम पाटीदार, राऊ, मध्यप्रदेश

उत्पादक: प्याज, मूंगफली, बागवानी
सुभाष मुकाती, धामनोद, मध्यप्रदेश

सुभाष मुकाती, धामनोद, मध्यप्रदेश

उत्पादक: डॉलर चना, भिन्डी, मक्का, सोयाबीन
भूपेंद्र पाटीदार, खरगोन

भूपेंद्र पाटीदार, खरगोन

उत्पादक: कपास, मिर्च, सब्जियां
रविंदर कुमार, पानीपत, हरियाणा

रविंदर कुमार, पानीपत, हरियाणा

उत्पादक: गेहूं, अरबी
सलमान खान, देवास, मध्यप्रदेश

सलमान खान, देवास, मध्यप्रदेश

उत्पादक: गेहूं, चना, सोयाबीन'
लोकेन्द्र सिंह ठाकुर, ठीकरी, मध्यप्रदेश

लोकेन्द्र सिंह ठाकुर, ठीकरी, मध्यप्रदेश

उत्पादक: मोरिंगा, चना, भिन्डी, बैंगन, मक्का
शैलेश साहू, राजनंदगांव, छत्तीसगढ

शैलेश साहू, राजनंदगांव, छत्तीसगढ

उत्पादक: टमाटर
कमल पाटीदार, बडवानी, मध्यप्रदेश

कमल पाटीदार, बडवानी, मध्यप्रदेश

उत्पादक: पपीता, डॉलर चना, लौकी, गिलकी, ग्लेडियोलस
कमलेश यादव, चोमू, राजस्थान

कमलेश यादव, चोमू, राजस्थान

उत्पादक; मिर्ची, टमाटर, सब्जियां
कपिल पाटीदार, छोटी खरगोन, मध्यप्रदेश

कपिल पाटीदार, छोटी खरगोन, मध्यप्रदेश

उत्पादक: केला, गन्ना, तरबूज, लोबिया, तुअर, मक्का
मिथुन पाटीदार, गोगावां

मिथुन पाटीदार, गोगावां

उत्पादक: डॉलर चना, मक्का, सोयाबीन
नितेश पटीदार, चुंदडिया

नितेश पटीदार, चुंदडिया

उत्पादक; डॉलर चना
हुकुम पाटीदार

हुकुम पाटीदार

उत्पादक: प्याज, पपीता, तरबूज, डॉलर चना, तुअर
इन्दरसिंह, मंदसौर

इन्दरसिंह, मंदसौर

उत्पादक: सोयाबीन,मिर्च, गेहूं, अफीम

'खेती हो या बागवानी, Bacter के साथ सब में आसानी'

Bacter का एकमात्र उद्देश्य कम से कम खर्चे में भूमि की गुणवत्ता में सुधार करते हुए कृषि उत्पादकता को अधिकतम संभव स्तर पर पहुँचाना है और खेती में अनावश्यक खर्चे को ख़त्म करना है.
crop information

सूक्ष्मजीवों के साथ ३२ दिन का सोयाबीन

सूक्ष्मजीवों का खेती में अप्रतिस्थापनीय स्थान है, इनकी जगह कोई और चीज नहीं ले सकती.  सही पोषण प्रबंधन के साथ फसल में प्रयोग किये गए सूक्ष्मजीव शानदार परिणाम देते हैं और खेती का अनावश्यक खर्च  Read more…

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बिना रसायन सफ़ेद लट का नियंत्रण

फसलों में सफ़ेद लट/व्हाइट ग्रब या गोबर कीट का नियंत्रण बहुत बड़ी और कठिन समस्या बनता जा रहा है. इस कीट का लम्बा एवं विविधतापूर्ण जीवनचक्र इसके नियंत्रण को कठिन बनाता है. व्हाइट ग्रब के Read more…

crop information

मैग्नीशियम-पौधों के पावरहाउस की भट्टी

परिचय, कार्य और कमी के लक्षण मैग्नीशियम पौधों के मुख्य पोषक तत्वों में आता है और पौधे के वजन का 0.2 से 0.4 प्रतिशत भाग बनाता है. रासायनिक रूप से मैग्नीशियम सल्फर और क्लोरीन के Read more…

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सोयाबीन में फंगस का नियंत्रण

सोयाबीन बारिश के समय लगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसल है. यह मूल रूप से लेग्यूम यानि दलहनी फसल है जो तिलहन और प्रोटीन स्त्रोत दोनों के तौर पर इस्तेमाल की जाती है. प्रोटीन और वसा Read more…

crop information

पिंक बोलवर्म

कॉटन बोल (ड़ेंडू) को नुकसान पहुँचाने वाले कई प्रकार के लार्वा हैं जो कॉटन बोल के भीतर पाए जा सकते हैं, जैसे कॉटन टिप वर्म, डाइसाईलोमिया मोथ का लार्वा, पिंक स्कावंजेर कैटरपिलर मोथ का लार्वा, Read more…

insect control

सोयाबीन की तनाछेदक मक्खी

सोयाबीन स्टेम फ्लाई या सोयाबीन की तनाछेदक मक्खी सोयाबीन का प्रमुख पेस्ट है. यह मक्खी सोयाबीन के कोमल पौधे पर अपने अंडे देती है जिससे निकलने वाला लार्वा पत्ती और तने को भीतर ही भीतर Read more…

insect control

व्हाइट ग्रब

व्हाइट ग्रब, स्क्रैब बीटल नामक कड़े काइटिन कवच वाले कीट के होते हैं. यह नाम कुछ-कुछ क्रैब से मिलता-जुलता है यानी केकड़े के जैसे दिखने वाले कीड़े. स्क्रैब बीटल की लगभग   30,000 प्रजातियां पाई जाती Read more…

insect control

थ्रिप्स का मैनेजमेंट

थ्रिप्स का परिचय थ्रिप्स बहुत छोटे कीट होते हैं। थ्रिप्स का सबसे पहला वर्णन फिलिपो बोनानी नामक कैथोलिक पादरी (1691) के कार्य में मिलता है. थ्रिप्स की लगभग 6000 प्रजातियां पाई जाती हैं, अधिकांश प्रजातियों Read more…

खेती का विज्ञान

जिप्सम

जिप्सम जिप्सम एक खनिज-रसायन है जिसका फार्मूला CaSO4 होता है. इसके साथ पानी के दो अणु भी जुड़े रहते हैं. यानि हाइड्रेटेड कैल्शियम सल्फेट. इस रूप में यह पानी में अघुलनशील होता है. खेती में Read more…

crop information

खरीफ के लिए सूक्ष्मजीव

मानसून का इंतजार कर रहे किसान जोर शोर से बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। प्लानिंग और समझदारी से की गयी खेती की शुरुआत, आगे आने वाली कई समस्याओं से बचा कर, फसल का अच्छा Read more…

crop information

अरंडी की खेती

अरंडी की खेती -पुष्पेन्द्र अवधिया 9926622048/7987051207 फसल परिचय: कैस्टर (Ricinus communis) या अरंडी यूफोर्बिएसी परिवार का पौधा है जिसकी खेती इसके अखाद्य तेल के लिए की जाती है. अरंडी ऊसर जमीन में खेती के लिए Read more…

खेती का विज्ञान

जीवाणु कंपोस्ट

जीवाणु कंपोस्ट -पुष्पेन्द्र अवधिया 9926622048/7987051207 जीवाणु कंपोस्ट, सूक्ष्मजीवों की मदद से तैयार किया गया कंपोस्ट है। सामान्य प्राकृतिक कंपोस्ट भी सूक्ष्मजीवों और कीटों की मदद से तैयार होता है परंतु जीवाणु कंपोस्ट इस मायने में Read more…

खेती का विज्ञान

पौधों के संकेतक

आइये पौधों के संकेतकों को समझें –पुष्पेन्द्र अवधिया 9926622048/7987051207   पौधे जंतुओं की तरह विपरीत परिस्थितियों में अपना स्थान नहीं छोड़ सकते न ही अनुकूल स्थान की ओर जा सकते. इन्हें अपने ही स्थान के Read more…

खेती का विज्ञान

गेहूं में प्राकृतिक एफिड नियंत्रण

बदलता क्लाइमेट, किसान का सबसे बड़ा सरदर्द है. यह किसान के लिए नई नई चुनौतियाँ खड़ी करता है. ऐसे रोग जो सामान्यतः किसी खास फसल में ही लगते थे, अब नई फसलों पर भी दिखने Read more…

खेती का विज्ञान

पौधों की जड़ें और उनका सूक्ष्मजैविक सम्बन्ध

यूं तो पौधों की जड़ें, जल और उसमें घुले खनिज लवणों के अवशोषण के लिए जानी जाती है. जड़ें पौधों को जमीन में सीधा खड़ा रखती है और तेज हवा, पानी आदि के बहाव में Read more…

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कोशिका

कोशिका (बायोलॉजी के छात्रों हेतु) कोशिका वह इकाई है जिसके भीतर जीवन के लिए जरूरी बायो केमिकल क्रियायें करने और द्विगुणित होने की क्षमता होती है। कोशिका, सभी जीवों की रचनात्मक, क्रियात्मक और जैविक इकाई Read more…

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पौधों की राख और इसकी उपयोगिता

इतनी कोशिशों के बाद भी भारत मे ईंधन के रुप मे लकड़ी, भूसे का प्रयोग जारी है। अब तो खेत के वेस्ट से निर्मित कंपोजिट बायोकोल का चलन बढ़ गया है। इन सबके जलने से Read more…

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खेती के सामान्य पर जरूरी सवाल

इस ब्लॉग में सुधी किसानों द्वारा समय समय पर उठाए गए सवालों के जवाब दिए जाते हैं। साथ ही, उन सवालों को भी उठाया जाता है, जिनकी जानकारी किसान को एक कदम आगे ले जा Read more…

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