पौधों की जड़ें (roots) और उनका सूक्ष्मजैविक (microbial) सम्बन्ध

root hairs- bacter
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पौधों की जड़ें (roots), मित्र सूक्ष्म जीवों को स्थान और भोजन देती हैं। अगर जड़ों के पास मित्र सूक्ष्म जीव न हों तो शत्रु और लुटेरे सूक्ष्म जीव इन जड़ों को निशाना बनाते हैं।

पौधों की जड़ें

यूं तो पौधों की जड़ें (roots), जल और उसमें घुले खनिज लवणों के अवशोषण के लिए जानी जाती है. जड़ें पौधों को जमीन में सीधा खड़ा रखती है और तेज हवा, पानी आदि के बहाव में बह जाने से रोकती हैं. इसके अलावा पौधों की जड़ें एक अन्य महत्वपूर्ण काम करती है जिससे अधिकांश लोग अनभिज्ञ हैं. यह खास काम है पौधों के मित्र सूक्ष्मजीवों को रहने के लिए स्थान प्रदान करना और उन्हें आवश्यक पोषक प्रदान करना.

Roots and root hairs of wheat seedlings

पौधों की जड़ें (roots) और उनका सूक्ष्मजैविक (microbial) सम्बन्ध

पौधों की जड़ें यानी roots लाभदायक सूक्ष्म जीवों को रहने के लिए स्थान और पोषण प्रदान करती हैं. अगर मित्र सूक्ष्म जीव न हों तो हानिकारक सूक्ष्म जीवों का निशाना भी बनती हैं.

पौधों की जड़ें इन खास सूक्ष्मजीवों के लिए खास पोषक पदार्थों का स्त्रावण करती हैं जिससे आकर्षित होकर लाभदायक सूक्ष्म जीव जड़ों के आसपास आकर रहने लगते हैं. इन सूक्ष्मजीवों की जैविक क्रियाओं से पौधों को कई प्रकार के जरुरी बायोकेमिकल प्राप्त होते हैं (जैसे की खास हॉर्मोन और वृद्धि नियंत्रक). पौधों के जड़ों के आसपास बसे खास सूक्ष्मजीव कठिन रूप से घुलनशील खनिजों को आसानी से घुलनशील रूप में परिवर्तित कर देते हैं जिसका लाभ पौधों को मिलता है (जैसे फॉस्फेट घोलक सूक्ष्मजीव, पोटाश घोलक और सल्फर मोबिलाइज़र अदि).

एजोटोबैक्टर (azotobacter) नामक बैक्टीरिया पौधों की जड़ों के आस-पास ही रहता है और हवा की नाइट्रोजन को अमोनियम रूप में परिवर्तित कर पौधों के उपलब्ध कराता है कुछ सूक्ष्मजीव तो पौधों की जड़ों के भीतर अपना आश्रय पाते हैं, जैसे राइजोबियम. यह एक खास प्रकार का संबंध है जो खास प्रजाति का पौधा एक खास प्रजाति के राइजोबियम के साथ ही बना सकता है, हर प्रकार का राइजोबियम हर प्रकार की दलहन फसल के साथ संयुक्त नहीं हो सकता इसलिए एक ही राइजोबियम हर फसल के लिए लाभकारी नहीं है.

चने और सोयाबीन का राइजोबियम अलग अलग होता है, दोनों की बनाई गठानों में फर्क देखिये;

Soybean Rhizobium nodules- bacter
सोयाबीन में राइजोबियम बैक्टीरिया के नोडयूल्स यानी गठानें
डॉलर चने की जड़ों में इजोबियम बैक्टीरिया के नोडयूल्स यानी गठानें (चने और सोयाबीन का राइजोबियम अलग अलग होता है, दोनों की बनाई गठानों में फर्क देखिये)

एक लाभदायक फफूंद जिसे वैम यानी वैस्कुलर अर्बस्कुलर माइकोराइजा कहा जाता है, पौधों की जड़ों की कोशिकाओं के भीतर अपने अर्बस्कुल फैलाता है. वैम भूमि के अंदर उन जगहों से भी पानी और खनिज लवण खींचकर पौधों को पहुंचाता है जहां पौधों की जड़ों की पहुंच नहीं हो पाती. बदले में पौधों की जड़ें माइकोराइजा को कार्बन यानी शर्करा उपलब्ध कराती हैं.

वैसे तो पौधों और लाभदायक सूक्ष्म जीवों का संबंध प्राकृतिक है परंतु प्रकृति सिर्फ लाभदायक सूक्ष्म जीवों का फेवर नहीं करती. उसके लिए लाभदायक और हानिकारक सूक्ष्मजीवों में अन्तर नहीं है, दोनों को बराबर का मौका देती है. देखा जाए तो, खेती के दौरान हानिकारक सूक्ष्म जीव ज्यादा तेजी से बढ़ते और फैलते हैं. इसलिए समय रहते फसल के पौधों में लाभदायक सूक्ष्म जीवों का इनोकुलेशन समझदारी भरा और बहुत लाभदायक कार्य है. यह क़दम खेती की कुल लागत का बहुत बड़ा हिस्सा बचा सकता है साथ ही पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि करता है. पौधों की रोग रोधी क्षमता और भूमि के के स्वास्थ्य की रक्षा भी करता है.

हानिकारक सूक्ष्म जीवों द्वारा नष्ट की हुई जड़ें.

अलग अलग प्रकार के सूक्ष्म जीव अलग अलग पौधों से अलग और विशिष्ट सम्बन्ध बनाते हैं. यानी फसलों पर सूक्ष्म जीवों का अलग और खास प्रभाव होता है.

लेखक परिचय:

डॉ. पुष्पेन्द्र अवधिया (Ph.D. लाइफ साइंस, M.Sc. इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी)

Pushpendra Awadhiya | Bacter | प्रकृति अनुकूल खेती|

विषय रूचिसूक्ष्मजीव विज्ञान, कोशिका विज्ञान, जैव रसायन और प्रकृति अनुकूल टिकाऊ कृषि विधियां

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