सोयाबीन के प्रमुख कीट (Pests of Soybean)

हरी सेमीलूपर इल्ली (B) Chrysodeixis acuta- bacter
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भारत में लगभग 260 लाख एकड़ में सोयाबीन (Soybean) की खेती होती है. अकेले मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजिस्थान मिला कर भारत के कुल सोयाबीन उत्पादन का 93% उत्पादित करते हैं. मध्यप्रदेश में सर्वाधिक, लगभग 125 लाख एकड़ में सोयाबीन उगाया जाता है.

सोयाबीन पोषण से भरपूर फसल है. सहजीवी बैक्टीरिया राइजोबियम, हवा में उपस्थित नाइट्रोजन को सोयाबीन के पौधे को उपलब्ध करवाता है जिससे फिर पौधा प्रोटीन का निर्माण करता है.

Soybean Rhizobium nodules- bacter

प्रोटीन से भरपूर फसल होने के कारण सोयाबीन की फसल पर अनेकों प्रकार के कीटों का हमला होता है जिससे उत्पादन को भारी नुकसान पहुचता है.

इन कीटों के प्रभावी और कम खर्च में नियंत्रण के लिए इन कीटों की पहचान, हमले का वक्त और तरीका पता होना बहुत जरुरी है. आइये जानें.

सोयाबीन की फसल के प्रमुख कीट

  • स्टेम फ्लाई यानी तना छेदक मक्खी Melanagromyza sojae
  • गर्डल बीटल Oberea brevis
  • तम्बाकू इल्ली Sodoptera Litura
  • हरी सेमीलूपर इल्ली Thysanoplusia orichalcea और Chrysodeixis acuta
  • फली छेदक इल्ली Helicoverpa armigera
  • लीफ़ फोल्डर Omiodes
  • ऐश विविल Myllocerus undicimpustulatus

स्टेम फ्लाई यानी तना छेदक मक्खी Melanagromyza sojae

soybean stem fly- bacter

यह कीट सोयाबीन कि शुरूआती अवस्था में ही अटैक करता है. 10 दिन के पौधों की पत्तियों में मादा मक्खी अंडे देती है. खासतौर पर पहली पहली दो पत्तियां इसके निशाने पर होती हैं. इन अण्डों से निकले मैगट अंदर ही अंदर तने तक सुरंग बनाते हैं. संवहन ऊतक की क्षति के कारण विल्टिंग आती है, पत्तियां सूखती हैं और ज्यादा नुकसान होने पर पौधा मर भी जाता है.

पत्ती में सांप नुमा धारी का दिखना, तने के भीतर इल्ली का मिलना और परिपक्व इल्ली के निकलने के स्थान पर जड़ में छिद्र का पाया जाना स्टेम फ्लाई के संक्रमण के चिन्ह हैं.

स्टेम फ्लाई और व्हाइट फ्लाई फसल की शुरुआती अवस्था में ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं. इनके नियंत्रण के लिए यलो ट्रैप बहुत प्रभावी हो सकते हैं.

damage caused by stem fly-bacter

गर्डल बीटल Oberea brevis

यूँ तो सोयाबीन में कई प्रकार के गर्डल बीटल पाए जाते हैं, परन्तु देश काल के अनुसार इनकी प्रजातियों अलग अलग होती हैं. भारत में सोयाबीन की फसल पर ओबेरिया ब्रेविस नाम का गर्डल बीटल प्रमुख रूप से पाया जता है. सोयाबीन में इस कीट के कारण सोयाबीन में 10-15% तक नुकसान हो सकता है. (चित्र  https://insektarium.net/ से साभार)

gurdle beetle

तम्बाकू इल्ली यानी Sodoptera Litura

यह कीट एक प्रकार का मोथ (तितली की तरह दिखने वाला) है. इसका लार्वा/ इल्ली कई फसलों को अपना निशाना बनाती है. मादा मोथ पत्तियों के निचली तरफ गुच्छे में अंडे देती है. अंडे से निकले लार्वा बड़े पैमाने पर फसल को क्षति पहुचाते हैं. ये पत्तियों के साथ साथ कोपलें, तना, फूल और फलियाँ तक चट कर जाते हैं.

sodoptera litura- bacter
Sodoptera Litura soybean- bacter

हरी सेमीलूपर इल्ली (A) Thysanoplusia orichalcea

शुरुआत पत्ती में छेड़ दिखने से होती है जो बाद में पूरी पत्तियों के  खाए जाने पर ख़त्म होती हैयह इल्ली हरे रंग की होती है जो चलते समय अर्ध वृत्ताकार रूप में मुड़कर चलती है. चित्र विकिपीडिया से साभार.

Thysanoplusia orichalcea

हरी सेमीलूपर इल्ली (B) Chrysodeixis acuta

यह मोथ भी सोयाबीन सहित ने फसलों पर दिखाई दे तो सावधान हो जाना चाहिए. इसका लार्वा भी सेमी लूपर इल्ली कहलाता है.

हरी सेमीलूपर इल्ली (B) Chrysodeixis acuta- bacter
हरी सेमीलूपर इल्ली (B) Chrysodeixis acuta

फली छेदक इल्ली Helicoverpa armigera

Helicoverpa armigera- bacter

अंडे से निकलने के बाद इल्ली, पहले कोमल पत्तियों को और बाद में फूल और कोमल तने को अपना भोजन बनाती है. और बड़ी होने पर फलियों और उनके भीतर विकसित हो रहे बीजों को अपना निशाना बनाती है. इसकी विशिष्टता यह है कि फली के भीतेर दाने खाते समय इसके शरीर का आधा हिस्सा फली के बाहर निकला रहता है. एक इल्ली पूरी तरह विकसित होने के दौरान औसतन 20-25 फलियाँ खा सकती है.

लीफ़ फोल्डर Omiodes

यह भी एक प्रकार का मोथ लार्वा है. यह मूंगफली, लैंटाना, तम्बाकू, मूंग, उड़द आदि को भी अपना निशाना बनाता है.  यह लार्वा दो या अधिक पत्तियों को आपस में चिपकाने के लिए उनके बीच अपने रेशमी धागों से जाल नुमा संरचना बनाता है. ये लार्वा इस खोल ले भीतर छिप कर पत्तियों के ऊतकों को खाता है. पत्तियों में तम्बाकू के रंग के मृत धब्बे बनना और मुड़ी हुई पत्तियां इस कीट कि निशानी हैं.

ऐश विविल Myllocerus undicimpustulatus

सफ़ेद रंग पर काली बिन्दकियों वाला यह कीट किसी फ़िल्मी भूत की तरह नजर आता है. इसके द्वारा किये गए नुकसान को पत्तियों के कटे फटे किनारों से समझा जा सकता है. चित्र विकिपीडिया से साभार.

Myllocerus undicimpustulatus

सोयाबीन बिना रसायन के कीट नियंत्रण

मित्र कीटों और कुछ भौतिक तरीकों से सोयाबीन में पेस्ट मैनेजमेंट किया जा सकता है ताकि हानिकारक रसायनों के प्रयोग से बचा जा सके.

हेकोवेर्पा आर्मिजेरा के नियंत्रण हेतु फेरोमोन ट्रैप उपलब्ध हैं. इन्हें प्रकाश प्रपंच लगा कर भी नियंत्रित किया जा सकता है. तना छेदक कीट के वयस्क भी प्रकाश प्रपंच कि ओर आकर्षित होते हैं.

खेत में कीट भक्षी शिकारी पक्षियों के बैठने के लिए सूखी झाड़ियाँ या मक्का बाजरा आदि लगा देना चाहिए. रात के समय उड़ने वाले  चमगादड़ भी कीट नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

व्हाइट फ्लाई और तना छेदक मक्खी के साथ साथ थ्रिप्स और अन्य प्रकार के रस चूसक कीट यलो ट्रैप द्वारा नियंत्रित किये जा सकते हैं, बशर्ते यलो ट्रैप सही वक्त पर लगा दिए जाएँ.

इस चित्र में आप यलो ट्रैप में चिपकी स्टेम फ्लाई, व्हाइट फ्लाई और लीफ़ हॉपर को चिपका हुआ देख सकते हैं.

stem fly white fly yellow trap- bacter

सोयाबीन में प्रयोग किये जाने वाले कीट नाशी रसायन

ट्राईएजोफोस नाम का रसायन सोयाबीन के कीटों के नियंत्रण के लिए संभवतः सर्वाधिक प्रयोग में लाया जाता है. इसकी विषाक्तता को देखते हुए दिसम्बर 2020 तक सरकार इसपर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा देगी. इसके स्थान पर क्लोरोपायरीफोस और प्रोफेनो फोस का इस्तेमाल अनुशंषित मात्रा और विधि के अनुसार जरुरत पड़ने पर किया जा सकता है. रासायनिक कीटनाशियों के प्रयोग का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह है कि ये मित्र कीटों को भी मार देते हैं जिससे विशेष प्रकार के कीटों जैसे सफ़ेद मक्खी अनियंत्रित रूप से बढ़ जाती है और उसका नियंत्रण कठिन काम है. इसलिए रासायनिक कीटनाशियों का प्रयोग अंतिम विकल्प के रूप में करना चाहिए.

पर्यावरण के लिए कम घातक रसायन जैसे एमामेक्टिन बेंजोएट और अबामेक्टिन के प्रयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए. ये उत्पाद भी आसानी से कीटनाशक दुकानों पर उपलब्ध हो जाते हैं.

सोयाबीन की फसल में सामान्यतः पाए जाने वाले मित्र कीट

  • प्रेयिंग मेंटिस
  • पत्तियों और फूलों की मकड़ियाँ
  • लेडी बीटल
  • हरा लेसविंग

प्रेयिंग मेंटिस

थोडा डरावना दिखने वाला यह कीट टिड्डा परिवार का मांसाहारी सदस्य है. यह कीटों का शिकार करके खाता है. इनकी प्रजनन क्षमता भी अच्छी होती है. यह काफी बड़े इलाके में घूम कर पौधों पर परजीवी कीटों को ढूंढ कर खाता है. यह कीट दिन में ज्यादा सक्रिय रहता है. खेती में प्रयोग किये जाने वाले तीव्र असर वाले कीटनाशियों के कारण इनका खात्मा हो जाता है.

praying mantis- bacter

पत्तियों और फूलों की मकड़ियाँ

मकड़ियाँ पौधों के ऊपर जाला बना कर और शिकार करके तरह तरह के कीटों कि संख्या को नियंत्रित रखती हैं. विभिन्न प्रजातियाँ दिन और रात के वक्त सक्रिय रहती हैं. लगभग हर तरह के कीटनाशी मकड़ियों के लिए घातक हैं.

big spider- bacter
flower spider 2- bacter
potato spider-bacter
flower spider- bacter
wolf spider- bacter
leaf spider- bacter

लेडी बीटल

चटख रंगों वाले ये कीट अपनी लार्वा अवस्था और वयस्क अवस्था में विभिन्न रस चूसक कीटों का सफाया करते हैं.

lady beetle wheat- bacter

हरा लेसविंग

सुन्दर हरे जालीदार पंखों और शिकार खोजने के लिए बड़ी बड़ी आँखों वाले ये कीट कई प्रकार के रस चूसक कीटों को अपना निशाना बनाते हैं.

green lacewing- bacter

लेखक परिचय:

Pushpendra Awadhiya | Bacter | प्रकृति अनुकूल खेती|

डॉ. पुष्पेन्द्र अवधिया (Ph.D. लाइफ साइंस, M.Sc. इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी)

विषय रूचिसूक्ष्मजीव विज्ञान, कोशिका विज्ञान, जैव रसायन और प्रकृति अनुकूल टिकाऊ कृषि विधियां

कृषि में उन्नति के लिए सही विधियों की जानकारी उतनी ही जरुरी है जितना उन विधियों के पीछे के विज्ञान को समझने की है. ज्ञान-विज्ञान आधारित कृषि ही पर्यावरण में हो रहे बदलावों को सह पाने में सक्षम होती है और कम से कम खर्च में उच्च गुणवत्ता कि अधिकतम उत्पादकता दे सकती है. खेत का पर्यावरण सुधरेगा तो खेती लंबे समय तक चल पायेगी. आइये सब की भलाई के लिए विज्ञान और प्रकृति अनुकूलता की राह पर चलें.
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