जीवाणु कंपोस्ट (Microbial Compost)

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जीवाणु कंपोस्ट (Microbial Compost), सूक्ष्मजीवों की मदद से तैयार किया गया कंपोस्ट है। सामान्य प्राकृतिक कंपोस्ट भी सूक्ष्मजीवों और कीटों की मदद से तैयार होता है परंतु जीवाणु कंपोस्ट इस मायने में अलग है कि इंसमे चयनित विशिष्ट सूक्ष्मजीव मानव द्वारा डाले जाते हैं।

Microbial Composting के लिए सूक्ष्मजीवों के प्रयोग से प्रमुख लाभ-

1- कंपोस्ट कम अवधि (लगभग 25-40 दिन) में तैयार हो जाता है.

2- डाले गए सूक्ष्मजीव कंपोस्ट में ही विशिष्ट बायो केमिकल्स, एंजाइम आदि का निर्माण करते हैं, जो फसल के लिए कई प्रकार से लाभकारी हैं।

3- इसप्रकार तैयार किये गए कम्पोस्ट की गुणवत्ता उच्च होती है। भूमि कि जलधारण क्षमता और जीवांश में बढ़ोत्तरी होती है.

कंपोस्ट (compost) तैयार करने वाले सूक्ष्मजीव फसल के कचरे के जैविक संरचना के अनुसार तैयार किये जाते हैं। इसके मायने यह हैं कि गोबर और धान के छिलके को एक ही सूक्ष्मजीव एक बराबर क्षमता से विघटित नहीं कर सकता। दोनों के लिए अलग प्रकार के सूक्ष्मजीव लगेंगे।

तैयार Microbial कम्पोस्ट. जीवाणु कम्पोस्ट तैयार होने के बाद  आसानी से छान भी सकते हैं

जीवाणु कम्पोस्ट (Microbial Compost) का विज्ञान

गोबर से तैयार जीवाणु  कम्पोस्ट (Microbial Compost)

पौधों के अपशिष्ट (गोबर भी पौध अपशिष्ट का एक प्रकार है), लकड़ी का बुरादा मिश्रित पौल्ट्री वेस्ट आदि को कंपोस्ट करने के लिए चुनिन्दा सूक्ष्मजीवों में विभिन्न प्रकार के एंजाइम बनाने की क्षमता होती है। ये एंजाइम पौधे की कोशिका भित्ति के विभिन्न अवयवों, पौधे द्वारा कोशिका में संचित भोज्य पदार्थों, और अन्य biochemicals को तोड़ कर पोषक पदार्थों को मुक्त करते हैं, जो फसल में डालने पर अन्य पौधों द्वारा अवशोषित किया जा सकते हैं। इन खास एंजाइम को निम्न श्रेणियों में बंटा जा सकता है।

1- सेलूलेज एंजाइम– पौधों की कोशिका भित्ति तोड़ने के लिए.

2- पेक्टिनेज एंजाइम– पौधों की कोशिका भित्ति तोड़ने के लिए

3- एमाइलेज एंजाइम– कोशिका में संचित स्टार्च को तोड़ने के लिए

4- प्रोटीएज एंजाइम– कोशिका में संचित प्रोटीन को तोड़ कर एमिनो अम्ल बनाने के लिए

5- लाइपेज एंजाइम – कोशिका में संचित वसीय पदार्थो को तोड़ने के लिए

6- न्यूक्लिऎज एंजाइम – कोशिका के डी एन ए, आर एन ए आदि अनुवांशिक मटेरियल को तोड़ने के लिए

उपरोक्त वर्णित एंजाइम के माध्यम से गोबर आदि में उपस्थित पौधों के अवयव टूटने पर उपयोगी जीवांश और पौधों के अवशोषण योग्य सरल पोषक तत्व प्राप्त होते हैं.

जिस खाद में कोशिका के अवयव बिना टूटे बने रहते हैं उसे कच्चा खाद कहा जाता है। अगर खेत मे कच्चा खाद डाल दिया जाए तो इसके अवयवों का फायदा उठा कर बीमारी फैलने वाले सूक्ष्मजीव अपनी संख्या बढ़ा लेते हैं. कच्चा खाद खेत में डालने पर फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

Microbial Compost बनाने की विधि

बैक्टर सुपर कम्पोस्टर (Bacter Super Composter) सूक्ष्मजीव कांसोर्टिया को फसल अपशिष्ट और इकट्ठा किये हुए गोबर के मिश्रण में मिलाया जाता है। अच्छी सूक्ष्मजैविक कार्यक्षमता के लिए पर्याप्त नमी रखी जाती है। और ढेर को ढक दिया जाता है।

Bacter Super Composter द्वारा निर्मित धान के छिलके (हस्क ) से बना सूक्ष्मजैविक कम्पोस्ट (Microbial Compost)

Bacter Super Composter सूक्ष्मजैविक कल्चर को पर्याप्त पानी मे मिला कर अपशिष्ट के ढेर में अच्छी तरह मिलना बहुत जरूरी है। तभी तय समय में खाद तैयार हो पाएगी।

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस प्रकार सूक्ष्मजीवों की मदद से लकड़ी का बुरादा और मुर्गी की बीट को 21 दिन में कंपोस्ट किया गया।

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लेखक परिचय:

Pushpendra Awadhiya

डॉ. पुष्पेन्द्र अवधिया (Ph.D. लाइफ साइंस, M.Sc. इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी)

विषय रूचिसूक्ष्मजीव विज्ञान, कोशिका विज्ञान, जैव रसायन और प्रकृति अनुकूल टिकाऊ कृषि विधियां

कृषि में उन्नति के लिए सही विधियों की जानकारी उतनी ही जरुरी है जितना उन विधियों के पीछे के विज्ञान को समझने की है. ज्ञान-विज्ञान आधारित कृषि ही पर्यावरण में हो रहे बदलावों को सह पाने में सक्षम होती है और कम से कम खर्च में उच्च गुणवत्ता कि अधिकतम उत्पादकता दे सकती है. खेत का पर्यावरण सुधरेगा तो खेती लंबे समय तक चल पायेगी. आइये सब की भलाई के लिए विज्ञान और प्रकृति अनुकूलता की राह पर चलें.
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