कार्बन (Carbon) और खेती

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किसान भाइयों ने हाल के कुछ वर्षों में कार्बन (carbon) का नाम काफ़ी सुना होगा. कुछ समूहों द्वारा कार्बन को खेती के लिए सबसे जरुरी तत्व बताया जाता है. आखिर कार्बन का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या यह तत्व सच में इतना महत्वपूर्ण है?

आइये इस तत्व के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों के विषय में जानें और खेती में कार्बन के रोल को समझें.

कार्बन क्या है?

कार्बन, जीवन के लिए जरुरी सबसे जरुरी तत्व है! कार्बन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के साथ मिलकर जीवन के आधारभूत जैविक अणुओं का निर्माण करता है.

कोशिका जिन पदार्थों से मिलकर बनी होती है उन्हें मोटे तौर पर दो समूहों में बांटा जा सकता है. आर्गेनिक चीजें यानी जिनका प्रमुख घटक कार्बन होता है. इनमे डीएनए, आरएनए, प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट, वसा, कोशिकांग, कोशिका भित्ति आदि आते हैं. इन चीजों का प्रमुख हिस्सा कार्बन होता है परन्तु अन्य तत्वों के बिना इनकी संरचना और क्रियाशीलता अधूरी होती है. कार्बन के अतिरिक्त अन्य तत्व जैसे आयरन, मैग्नीशियम, जिंक आदि धात्विक आयन; सल्फ़र, फॉस्फोरस, पोटेशियम आदि तथा हाइड्रोजन, ऑक्सीजन आदि नॉन-ऑर्गानिक (Inorganic) हिस्से कहलाते हैं. कोशिका के भीतर आर्गेनिक और इन-ऑर्गानिक हिस्सों के बीच जीवंत सम्बन्ध होता है. वस्तुतः कार्बन और नॉन-ऑर्गानिक हिस्सों के बीच अंतर्संबंध ही जीवन को जन्म देता है.

कार्बन के इस अद्भुत रोल के पीछे उसके द्वारा जटिल से जटिल संरचनाओं के निर्माण करने की क्षमता है. ये संरचनाएं पर्याप्त रूप से स्टेबल भी होतीं हैं, और लम्बे समय तक चलती हैं. अर्थात इन्हें तुलनात्मक रूप से अक्रियाशील कहा जा सकता है. (कोई वस्तु अक्रियाशील रहेगी तभी लम्बे समय तक टिकेगी)

कोयला, हीरा, पेन्सिल का ग्रेफाइट कार्बन के शुद्ध रूप हैं. इन रूपों के भौतिक गुण, संरचना में भिन्नता के कारण अलग अलग होते हैं. ये तीनों ही रूप रासायनिक रूप से लगभग अक्रियाशील होते हैं. पेट्रोल, घरेलु गैस, अल्कोहल, ग्लूकोज, शक्कर और कपास का रेशा एक तरह से मुख्यतः कार्बन (और हाइड्रोजन, ऑक्सीजन) से बने होते हैं. कार्बन ने बने यौगिकों की संख्या अपार है. यहाँ तक कि यूरिया जो कि जंतुओं के प्रोटीन उपापचय से निर्मित व्यर्थ पदार्थ है, बिना कार्बन के नहीं बन सकता. इसकी संरचना में दो नाइट्रोजन के साथ एक कार्बन अणु आबंधित होता है (NH2-CO-NH2). यूरिया के माध्यम से पौधे नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं.

पौधे कार्बन डाई ऑक्साइड से ग्लूकोज बनाते हैं, और जंतु तथा सूक्ष्म जीव ग्लूकोज और अन्य पौध उत्पादों का उपभोग करके कार्बन डाई ऑक्साइड बनाते हैं.

कार्बन कहाँ से आता है?

पौधे के पोषक तत्वों में से कार्बन हवा में उपस्थित कार्बन डाई ऑक्साइड से प्राप्त होता है.

इस कार्बन डाई ऑक्साइड का इस्तेमाल करने के लिए पौधे सूर्य से प्राप्त प्रकश ऊर्जा और पानी का इस्तेमाल करते हैं. पौधे कार्बन डाई ऑक्साइड से प्राप्त कार्बन को क्लोरोफिल के द्वारा शर्करा और अन्य उपयोगी oraganic कंपोनेंट्स में परिवार्तित कर लेते हैं. इन्ही घटकों से पौधे के शरीर का निर्माण होता है, फल बनते हैं और उनमें संचित भोजन का निर्माण होता है.

फिर जब ये फल या पौधे जंतुओं, कीटों, पक्षियों और सूक्ष्म जीवों द्वारा खाए जाते हैं तब ये आर्गेनिक (organic) हिस्से उर्जा निर्माण के लिए, साँस द्वारा ली गई ऑक्सिजन की मदद से तोड़ दिए जाते हैं और अंततः कार्बन डाई ऑक्साइड का निर्माण होता है. हवा के माध्यम से पुनः यह कार्बन डाई ऑक्साइड पौधे तक पहुँच जाती है.

जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल, डीजल आदि) के जलने से भी कार्बन डाई ऑक्साइड का निर्माण होता है. जैसा कि आप जानते हैं जीवाश्म ईंधनहजारों साल पहले भूमि में दबे प्राचीन पौधों, जंतुओं और सूक्ष्म जीवों के तापीय विघटन से निर्मित होते हैं. इनके दहन से उत्पन्न कार्बन डाई ऑक्साइड वातावरण में कार्बन असंतुलन पैदा करती है. अतिरिक्त कार्बन डाई ऑक्साइड ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती है. मौसम में नियमति बदलावों के रूप में  ग्लोबल वार्मिंग का सबसे ज्यादा दुष्परिणाम किसानों के हिस्से आता है.

पौधे कार्बन डाई ऑक्साइड से लिग्निन जैसी जटिल जीवाणु रोधी संरंचना का निर्माण भी करते हैं, जो सालों साल चलती है. (चित्र www.wikipedi.org से साभार)
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क्लोरोफिल अणु की संरचना के उदाहरण से देख सकते है कि किसप्रकार कार्बन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के साथ मिलकर जैविक अणुओं का निर्माण करता है. कार्बन के अलावा नाइट्रोजन और मैग्नीशियम इसकी क्रियाशीलता के लिए जरुरी हैं. चित्र www.wikipedia.org से साभार

आर्गेनिक मैटर क्या चीज है?

ऊपर वर्णित प्रक्रिया से आप यह तो समझ गए होंगे कि जीवित पौधों, जंतुओं और सूक्ष्म जीवों के बीच कार्बन का चक्र किस प्रकार चलता है. पौधे सिर्फ कार्बन डाई ऑक्साइड के रूप में ही कार्बन को अवशोषित करते हैं, किसी अन्य रूप में नहीं.

जमीन पर पौधों के अतिरिक्त अन्य जंतु कार्बन (स्टार्च, शर्करा, प्रोटीन, वसा आदि) को पौधों से ही प्राप्त करते हैं.

मरने के बाद पौधों, जंतुओं और सूक्ष्म जीवों के शरीर भूमि में सूक्ष्म जीवों के माध्यम से धीरे धीरे विघटित होते हैं. इन मरे हुए पौधों और जंतुओं के शरीर में उपस्थित कार्बन का अधिकांश हिस्सा कार्बन डाई ऑक्साइड गैस के रूप में बदल कर हवा में मिल जाता है. परन्तु पौधों के शरीर में बने जटिल आर्गेनिक अवयव जैसे सूक्ष्म जीव रोधी लिग्निन आदि पूरी तरह कार्बन डाई ऑक्साइड में  विघटित नहीं होते और रूपांतरित हो जाते हैं. विघटन के बाद बचे इन आर्गेनिक अवयवों और इन-ऑर्गानिक तत्वों को सामान्य भाषा में आर्गेनिक मैटर कहा जाता है.

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जीवांश/जैविक खाद

उपरोक्त बातों से स्पष्ट है कि खेती के लिए हमें कार्बन की नहीं बल्कि जीवांश यानी अच्छे कम्पोस्ट की फ़िक्र करनी चाहिए.

लेखक परिचय:

Pushpendra Awadhiya | Bacter | प्रकृति अनुकूल खेती|

डॉ. पुष्पेन्द्र अवधिया (Ph.D. लाइफ साइंस, M.Sc. इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी)

विषय रूचि- सूक्ष्मजीव विज्ञान, कोशिका विज्ञान, जैव रसायन और प्रकृति अनुकूल टिकाऊ कृषि विधियां

कृषि में उन्नति के लिए सही विधियों की जानकारी उतनी ही जरुरी है जितना उन विधियों के पीछे के विज्ञान को समझने की है. ज्ञान-विज्ञान आधारित कृषि ही पर्यावरण में हो रहे बदलावों को सह पाने में सक्षम होती है और कम से कम खर्च में उच्च गुणवत्ता कि अधिकतम उत्पादकता दे सकती है. खेत का पर्यावरण सुधरेगा तो खेती लंबे समय तक चल पायेगी. आइये सब की भलाई के लिए विज्ञान और प्रकृति अनुकूलता की राह पर चलें.
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